UP में गन्ना किसानों को बड़ी राहत, पेराई सीजन में 31 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान

Sugarcane Payment UP: उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर है. 2025-26 पेराई सीजन में चीनी मिलों ने किसानों को करीब 31 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है, जो कुल बकाया का 90 फीसदी से ज्यादा है. सरकार के मुताबिक, 2017 से अब तक किसानों को 3.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान किया जा चुका है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 2 Jun, 2026 | 06:30 PM

UP Sugarcane Farmers: उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य माना जाता है और यहां लाखों किसान अपनी आजीविका के लिए गन्ने की खेती पर निर्भर हैं. किसानों की आय को समय पर सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार लगातार चीनी मिलों के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है. इसी दिशा में 2025-26 के चालू पेराई सीजन में गन्ना किसानों को बड़ी राहत मिली है. सरकार के अनुसार, अधिकांश किसानों को उनके गन्ने का भुगतान किया जा चुका है और बकाया राशि भी तेजी से चुकाई जा रही है.

चालू सीजन में किसानों को मिला 31 हजार करोड़ रुपये

इस पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को करीब 31 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है. सीजन की शुरुआत में किसानों का लगभग 35 हजार करोड़ रुपये बकाया था, लेकिन अब ज्यादातर पैसा किसानों के खातों में पहुंच चुका है. सरकार का कहना है कि भुगतान में देरी न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है. समय पर पैसा मिलने से किसानों को आर्थिक राहत मिल रही है और वे अगली फसल की तैयारी भी आसानी से कर पा रहे हैं.

2017 से 2026 के बीच रिकॉर्ड भुगतान

राज्य सरकार के अनुसार, साल 2017 से 2026 के बीच गन्ना किसानों को कुल 3.27 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है. यह राशि किसानों तक पहुंचने से गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और कृषि क्षेत्र में भी नकदी का प्रवाह बढ़ा है. सरकार का कहना है कि समय पर भुगतान मिलने से किसानों का भरोसा बढ़ा है और गन्ने की खेती के प्रति उनकी रुचि भी मजबूत हुई है.

यूपी का चीनी उद्योग क्यों है खास?

उत्तर प्रदेश सिर्फ गन्ना उत्पादन ही नहीं, बल्कि चीनी उत्पादन में भी देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है. राज्य में इस समय 121 चीनी मिलें काम कर रही हैं, जो किसानों से गन्ना खरीदकर चीनी बनाती हैं. इनमें 95 निजी चीनी मिलें हैं. इसके अलावा 23 सहकारी चीनी मिलें और 3 राज्य सरकार की चीनी मिलें भी संचालित हैं. चीनी मिलों का यह बड़ा नेटवर्क किसानों से गन्ना खरीदने और उनका भुगतान समय पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है.

गुड़ और खांडसारी उद्योग की भी अहम भूमिका

चीनी मिलों के अलावा प्रदेश में गुड़ और खांडसारी उद्योग भी गन्ने की खपत में बड़ी भूमिका निभाता है. खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को इस उद्योग का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यह उद्योग किसानों को गन्ना बेचने का एक अतिरिक्त विकल्प देता है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार मिलने में मदद मिलती है. अनुमान है कि देश में पैदा होने वाले कुल गन्ने का 15 से 25 प्रतिशत हिस्सा गुड़ और खांडसारी उद्योग द्वारा खरीदा जाता है.

गन्ना किसानों को समय पर भुगतान मिलने से उनकी नकदी जरूरतें पूरी होती हैं और खेती में निवेश करना आसान हो जाता है. साथ ही, चीनी मिलों और गुड़ उद्योग की मजबूत मौजूदगी किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराती है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़