Seafood exports: भारत का समुद्री उत्पाद कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब दुनिया भर में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है. साल 2025-26 में इस क्षेत्र ने नया रिकॉर्ड बनाया है, जिससे साफ है कि भारत के समुद्री उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. यह सफलता केवल एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे कृषि और निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निर्यात
समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण(MPEDA) के अनुसार, साल 2025-26 में देश से समुद्री उत्पादों का निर्यात 72,325.82 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. मात्रा के हिसाब से यह आंकड़ा 19.32 लाख टन रहा. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारत के उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत जगह बना रहे हैं और लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं.
झींगा बना सबसे बड़ा सहारा
इस पूरे निर्यात में सबसे ज्यादा योगदान झींगा का रहा. अकेले झींगा से लगभग 47,973.13 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो कुल निर्यात का दो-तिहाई से भी ज्यादा है. झींगा की मांग में भी बढ़ोतरी हुई है. मात्रा में करीब 4.6 प्रतिशत और कीमत के हिसाब से 6.35 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. इससे साफ है कि झींगा इस क्षेत्र की रीढ़ बना हुआ है.
अमेरिका में कमी, लेकिन असर नहीं पड़ा ज्यादा
अमेरिका अब भी भारत के लिए सबसे बड़ा बाजार है, जहां से करीब 2.32 अरब डॉलर का व्यापार हुआ. लेकिन इस बार वहां निर्यात में कमी देखी गई. मात्रा में लगभग 19.8 प्रतिशत और कीमत में 14.5 प्रतिशत की गिरावट आई. इसकी वजह व्यापार से जुड़े नियम और शुल्क माने जा रहे हैं.
चीन और यूरोप ने संभाला मोर्चा
अमेरिका में आई गिरावट के बावजूद भारत ने दूसरे देशों में शानदार प्रदर्शन किया. चीन में निर्यात में करीब 22.7 प्रतिशत की बढ़त हुई, वहीं मात्रा में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. यूरोप के देशों में भी निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी हुई, जहां कीमत में लगभग 37.9 प्रतिशत और मात्रा में 35.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली, जबकि जापान में हल्की बढ़ोतरी हुई. पश्चिम एशिया में थोड़ी कमी आई, जिसका कारण वहां का तनावपूर्ण माहौल रहा.
अन्य उत्पादों ने भी दिया साथ
सिर्फ झींगा ही नहीं, बल्कि अन्य समुद्री उत्पादों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया. जमी हुई मछली, स्क्विड, कटलफिश, सूखे उत्पाद और जीवित समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी बढ़त दर्ज की गई. इसके अलावा मछली से बने अन्य उत्पादों जैसे मछली आटा और मछली तेल का प्रदर्शन भी बेहतर रहा. हालांकि ताजे उत्पादों के निर्यात में थोड़ी कमी आई.
बंदरगाहों की बड़ी भूमिका
देश के प्रमुख बंदरगाहों ने इस सफलता में अहम योगदान दिया. विशाखापत्तनम, न्हावा शेवा, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई जैसे बंदरगाहों से करीब 64 प्रतिशत निर्यात हुआ. इन बंदरगाहों की बेहतर व्यवस्था और सुविधाओं ने निर्यात को आसान बनाया.
बदलती रणनीति का असर
इन आंकड़ों से यह भी साफ होता है कि भारत अब केवल पुराने बाजारों पर निर्भर नहीं है. नए देशों में तेजी से बढ़ता निर्यात यह दिखाता है कि भारत अपनी रणनीति बदल रहा है और नए अवसरों का लाभ उठा रहा है. यह कदम भविष्य में इस क्षेत्र को और मजबूत बना सकता है.