गो मित्र अभियान का क्या है पूरा प्लान? जानिए युवाओं को ट्रेनिंग और कमाई का फायदा

उत्तर प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण को नई ताकत देने के लिए ‘गो मित्र अभियान’ शुरू करने की तैयारी में है. योजना के तहत करीब 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे वे पशुपालन, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण स्वरोजगार से जुड़कर कमाई के नए अवसर हासिल कर सकेंगे.

नोएडा | Published: 18 Aug, 2026 | 02:48 PM

UP Go Mitra Abhiyan: उत्तर प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण को नई दिशा देने की तैयारी में है. सरकार जल्द ‘गो मित्र अभियान’ शुरू कर सकती है, जिसके तहत करीब 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा. यह पहल केवल बेसहारा गोवंश की देखभाल तक सीमित नहीं होगी, बल्कि प्राकृतिक खेती, पशुपालन और गोबर-गोमूत्र आधारित ग्रामीण उद्यमों से युवाओं को जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार करेगी.

क्या है ‘गो मित्र अभियान’?

‘गो मित्र अभियान’ उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित पहल है, जिसका उद्देश्य गांवों के युवाओं  को गोवंश संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनाना है. योजना के तहत चयनित युवाओं को गोवंश की देखभाल, पशुपालन, प्राकृतिक खेती और जैविक संसाधनों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि ग्रामीण स्तर पर प्रशिक्षित युवा गोशालाओं, पशुपालकों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकते हैं. इससे बेसहारा गोवंश की निगरानी और संरक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

10 हजार युवाओं को कैसे मिलेगी ट्रेनिंग?

अभियान की शुरुआत मास्टर ट्रेनर मॉडल से किए जाने की तैयारी है. पहले विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की टीम तैयार होगी, जो आगे गांव-गांव जाकर युवाओं और बच्चों को प्रशिक्षण देगी. प्रशिक्षण में पशुओं का स्वास्थ्य, पोषण, गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यम जैसे विषय शामिल किए जा सकते हैं. हालांकि आवेदन प्रक्रिया, आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता और चयन के नियमों की विस्तृत आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है. इच्छुक युवाओं को सरकार की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा.

गो मित्रों की क्या होगी जिम्मेदारी?

प्रशिक्षित गो मित्र गांवों में बेसहारा गोवंश की स्थिति पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर गोशालाओं या पशुपालन विभाग को सूचना देंगे. वे पशुओं की देखभाल, टीकाकरण और संरक्षण संबंधी जागरूकता फैलाने में भी सहयोग कर सकते हैं. इसके अलावा गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय  आय के नए स्रोत विकसित हो सकते हैं.

गोसंरक्षण के साथ रोजगार पर भी फोकस

विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है. एक ओर गांवों में गोवंश संरक्षण  को संगठित स्वरूप मिलेगा, वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षित युवाओं को पशुपालन और जैविक कृषि से जुड़े स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं. यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो ‘गो मित्र’ केवल स्वयंसेवक नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले प्रशिक्षित युवा संसाधन के रूप में उभर सकते हैं. अब सभी की नजर सरकार द्वारा जारी होने वाले विस्तृत दिशा-निर्देशों और आवेदन प्रक्रिया पर टिकी है.

किसे मिलेगा क्या फायदा?

गो मित्र अभियान’ के तहत राज्यभर के करीब 10 हजार युवाओं को गो सेवा, पशुपालन और संरक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा. पहले मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे, जो गांवों में अन्य युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे. ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को गोबर-गोमूत्र आधारित उत्पादों से स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे. वहीं प्राकृतिक खेती, हरित ऊर्जा और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

Topics: