अब गांवों की किस्मत बदलेगी, उत्तर प्रदेश में पंचायतों की रैंकिंग से तय होगा 2 से 40 लाख का बजट

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है. इसके तहत पंचायतों को उनकी स्थिति के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाएगा और उसी अनुसार बजट तय होगा. इससे गांवों में विकास कार्यों में तेजी आएगी और रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे.

नोएडा | Published: 28 Jun, 2026 | 02:35 PM

VB-GRAM-G Scheme: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए 1 जुलाई से एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है. इस नई प्रणाली के तहत राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को उनके विकास स्तर, उपलब्ध संसाधनों और जरूरतों के आधार पर आंका जाएगा. इसके बाद पंचायतों को अच्छी, मध्यम और पिछड़ी तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा. इसी रैंकिंग के आधार पर पंचायतों को बजट मिलेगा और विकास कार्यों की मंजूरी दी जाएगी. यह पूरी व्यवस्था विकसित भारत जी-राम-जी (VB-GRAM-G) योजना के तहत लागू होगी.

1 जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था, पूरे उत्तर प्रदेश में बदलाव

उत्तर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में 1 जुलाई से यह नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी. प्रत्येक पंचायत का मूल्यांकन उसके वर्तमान विकास स्तर, उपलब्ध संसाधनों और जरूरतों के आधार पर किया जाएगा. इसके बाद उन्हें तीन श्रेणियों में रखा जाएगा-अच्छी, मध्यम और पिछड़ी पंचायतें. इस वर्गीकरण का उद्देश्य ये है कि जिन गांवों में विकास की ज्यादा  जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जा सके और वहां तेजी से काम हो.

पंचायत की कार्ययोजना के आधार पर मिलेगा बजट

नई व्यवस्था में हर ग्राम पंचायत को अपनी कार्ययोजना खुद तैयार करनी होगी. इसी योजना के आधार पर उन्हें बजट आवंटित किया जाएगा. इससे बजट का सही उपयोग सुनिश्चित होगा और विकास कार्य जरूरत के अनुसार होंगे. पहले जहां बजट सामान्य तरीके से दिया जाता था, अब उसे पंचायत की स्थिति और विकास योजना के अनुसार तय किया जाएगा. इससे गांवों में विकास कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है.

मनरेगा में 125 दिन रोजगार और देरी पर मुआवजा

नई व्यवस्था में ग्रामीण परिवारों  को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही, मनरेगा मजदूरी का भुगतान समय पर न होने पर श्रमिकों को 0.5 प्रतिशत प्रतिकर (मुआवजा) देने का भी प्रावधान किया गया है. इससे ग्रामीण मजदूरों को समय पर भुगतान मिलेगा और रोजगार की स्थिति भी मजबूत होगी.

प्रशिक्षण और विकास कार्यों में आएगी तेजी

इस योजना को सफल बनाने के लिए मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों  और तकनीकी सहायकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. इससे योजना को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा. पंचायतों को मिलने वाले बजट से गांवों में नाली, सड़क, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, खड़ंजा, तालाब और बंधा निर्माण जैसे विकास कार्यों में तेजी आएगी. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. वर्तमान में उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त आयोग, केंद्रीय वित्त आयोग और मनरेगा के तहत हर साल 2 लाख रुपये से 40 लाख रुपये तक का बजट मिलता है. अब यह राशि पंचायत की श्रेणी और कार्ययोजना के आधार पर तय की जाएगी, जिससे विकास कार्य और अधिक प्रभावी बन सकेंगे.

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