अन्नपूर्णा योजना की पहली किस्त जारी, 1.10 करोड़ महिलाओं के खाते में पहुंचे 3,000 रुपये

Annapurna Yojana: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अन्नपूर्णा योजना के तहत 1.10 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 3,000 रुपये की पहली किस्त भेज दी है. इस योजना के लिए 1.60 करोड़ आवेदन आए थे, लेकिन नागरिकता और निवास संबंधी दस्तावेजों में गड़बड़ी के कारण 26 लाख आवेदन खारिज कर दिए गए.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 1 Jul, 2026 | 03:58 PM

Annapurna Yojana West Bengal: पश्चिम बंगाल सरकार ने अन्नपूर्णा योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता देना शुरू कर दिया है. बुधवार (1 जुलाई) को योजना की पहली किस्त के रूप में राज्य की करीब 1 करोड़ 10 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 3,000 रुपये ट्रांसफर किए गए. सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और परिवार के खर्चों में मदद करना है. सरकार का मानना है कि अन्नपूर्णा भंडार योजना से लाखों महिलाओं को घरेलू खर्च चलाने में मदद मिलेगी. नियमित आर्थिक सहायता मिलने से वे परिवार की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी कर सकेंगी और आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेंगी.

पहली किस्त सीधे बैंक खाते में भेजी गई

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने योजना की पहली किस्त जारी करते हुए बताया कि, पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए राशि भेजी गई है. इससे महिलाओं को बिना किसी बिचौलिए के सीधे आर्थिक सहायता मिलेगी. सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक मदद देने का प्रावधान किया गया है.

1.60 करोड़ लोगों ने किया था आवेदन

मुख्यमंत्री ने बताया कि अन्नपूर्णा योजना के लिए राज्यभर से करीब 1.60 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी दस्तावेजों और पात्रता की जांच की गई. जांच के बाद करीब 1 करोड़ 10 लाख महिलाओं को योजना का लाभ देने के लिए पात्र माना गया और उनके खातों में पहली किस्त भेज दी गई. राज्य सरकार का कहना है कि आगे भी पात्र लाभार्थियों को समय पर योजना की किस्तें जारी की जाएंगी और पात्रता से जुड़ी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से जारी रहेगी.

26 लाख आवेदन क्यों हुए खारिज?

पश्चिम बंगाल सरकार ने बताया कि जांच के दौरान करीब 26 लाख आवेदन रद्द कर दिए गए. इन आवेदनों को नागरिकता और पश्चिम बंगाल में निवास से जुड़े दस्तावेजों में संदेह या पात्रता पूरी न होने के कारण अस्वीकार किया गया. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों को ही मिलना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री ने कहा कि, भारत और पश्चिम बंगाल के करदाताओं के पैसे का उपयोग केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जिन आवेदनों में नागरिकता या निवास को लेकर संदेह था, उन्हें नियमों के अनुसार खारिज किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और किसी तरह की गड़बड़ी न हो.

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