देशभर में रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं खरीद तेजी से चल रही है. गेहूं खरीद के मामले में मध्य प्रदेश अपने निर्णयों के चलते लगातार सुर्खियों में है. राज्य में 17 मार्च से खरीद शुरू होने का दावा किया गया था, जो बाद बढ़ाकर 10 अप्रैल और 15 अप्रैल किया गया. खरीद में देरी और सुस्त रफ्तार ने किसानों को परेशान किया तो सरकार ने एक के बाद एक कई बड़े निर्णय लिए हैं, जिनमें खरीद टारगेट बढ़ाने से लेकर खरीद की डेडलाइन और स्लॉट बुकिंग की तारीखें बढ़ाने तक शामिल है. जबकि, खरीद मानकों में भी छूट दी गई है. हालांकि, इसके बावजूद किसानों का आरोप है कि सरकार दावे तो कर रही है पर जमीन पर हकीकत कुछ और है.
गेहूं खरीद के लिए सरकार के 5 बड़े निर्णय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में कहा है कि किसानों के हित में गेहूं खरीद का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है. लघु एवं सीमांत कृषकों के साथ-साथ मध्यम और बढ़े किसानों के लिये भी स्लॉट बुकिंग भी शुरू कर दी गई है, जो पहले नहीं हो रही थी. इसके अलावा खरीद केंद्रों की क्षमता 1000 क्विंटल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन कर दी गई है. वहीं, स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 09 मई तक कर दी गई है. जबकि, केंद्र ने बारिश के चलते चमकहीन और टूटे-सिकुड़े गेहूं को खरीदने के लिए मानकों में ढील का निर्णय भी लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निर्णयों से किसानों की आवक केंद्रों पर अब तेजी से बढ़ेगी. कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में प्रबन्ध सुनिश्चित करें.
चना और मसूर की खरीद मण्डी में शेड के अंदर होगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडियों में अपनी उपज बेचने आ रहे किसानों को समस्त प्रकार की सुविधायें उपलब्ध हों और किसी भी प्रकार से तकलीफ न हो. खरीद केन्द्रों पर तौल कांटें, हम्माल, छाया, पानी आदि की व्यवस्था की जाए. सभी कलेक्टर्स प्रतिदिन गेहूं खरीदी, परिवहन व्यवस्था, भंडारण तथा किसानों के भुगतान की समीक्षा करें. चना और मसूर की खरीदी मण्डी में शेड के अंदर की जाए ताकि असमय बारिश से नुकसान न हो. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चना-मसूर उपार्जन की व्यवस्था के संबंध में जिला स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए.
कई जिलों में गेहूं खरीद की समीक्षा और निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गेहूं खरीद का लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन किया गया है. इसके लिए केंद्र सरकार का उन्होंने आभार जताया. प्रदेश में जरूरी बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है. प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर 7 दिवस की खरीदी के लिए बारदान की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. प्रत्येक खरीद केन्द्र पर न्यूनतम 6 इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों की व्यवस्था हों और निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही गेहूं का उपार्जन किया जाए.मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीद केन्द्रों के अतिरिक्त किसानों के द्वारा मंडी में किए जा रहे उपज बिक्री की निगरानी की जाए, जिससे किसानों को कोई समस्या न हो. उन्होंने गुना, रायसेन, दतिया, सीधी, विदिशा जिले के कलेक्टर्स से वर्चुअली संवाद कर जिलों की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली.
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद के ताजा आंकड़े
मध्य प्रदेश में 3 हजार 516 खरीद केन्द्र संचालित हैं. कुल 8 लाख 55 हजार किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई है, जिनमें से 3 लाख 96 हजार किसानों से 16 लाख 60 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद कर 2 हजार 527 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है. मध्यम एवं बड़े श्रेणी के 40 हजार 457 किसानों द्वारा 5 लाख 88 हजार मीट्रिक टन मात्रा के स्लॉट बुक किए गए हैं. किसानों को तहसील के स्थान पर जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज बिक्री की सुविधा दी गई है.
भारतीय किसान संघ ने 5 दिन का अल्टीमेटम दिया
भारतीय किसान संघ के मालवा प्रांत प्रचार प्रमुख गोवर्घन पाटीदार ने बताया कि किसानों की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर एक एक दाना खरीदने का दंभ भरते हैं तो उसे पूरा भी करना चाहिये. इसलिये सभी पंजीकृत 19 लाख किसानों से गेहूं का एक एक दाना खरीदने की व्यवस्था की जाए. दो हेक्टेयर से ऊपर वाले किसानों की खरीदी तुरंत सरकार करे. उन्होंने कहा कि मंडियों और खरीद केंद्रों पर अव्यवस्थाएं हैं उन्हें दूर किया जाए. उन्होंने बताया कि किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने सरकार व प्रशासन को 5 दिनों का अल्टीमेटम दिया है.
किसान महापंचायत ने अव्यवस्थाओं की पोल खोली
किसान महापंचायत मध्य प्रदेश के अध्यक्ष राजेश धाकड़ ने किसान इंडिया को बताया कि गेहूं खरीद में ढीले रवैये ने किसानों की मुसीबत बढ़ाई है. मंडियों में खरीद व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होने से किसान औने-पौने दाम पर निजी प्लेयर्स को अपना अनाज बेचने को मजबूर है. उन्होंने कहा कि किसानों के पास भंडारण की व्यवस्था नहीं है और वह खेत में अपनी उपज को रोक नहीं सकते हैं. इसलिए वह मंडियों में उपज लेकर पहुंच रहे हैं. लेकिन, सरकारी दावे कागजों पर ज्यादा सटीक दिखते हैं पर जमीनी हकीकत उतनी दुरुस्त नहीं है.