Chicken Price Hike: देशभर में महंगे हुए अंडे-चिकन, पोल्ट्री फीड की बढ़ती कीमतें बनीं बड़ी वजह

देशभर में अंडे और चिकन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इसकी बड़ी वजह पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत है. फीड में मक्का और सोयाबीन मील की अहम हिस्सेदारी होती है. मक्के की मांग इथेनॉल कंपनियों में बढ़ने से भी कीमतों पर दबाव है. सोयाबीन मील की सीमित सप्लाई ने उत्पादन लागत बढ़ाई है, जिसका असर ग्राहकों पर पड़ रहा है.

नोएडा | Published: 29 Aug, 2026 | 06:12 PM

देशभर में इस साल अंडे और चिकन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. इससे लोगों के लिए प्रोटीन के इन सस्ते स्रोतों का खर्च बढ़ गया है. कीमतों में तेजी की एक वजह मौसम से जुड़ी परेशानियां और मौसमी सप्लाई में कमी है. हालांकि, इसकी बड़ी वजह पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत भी है. पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाले मक्का, सोयाबीन मील और दूसरी कृषि उपज महंगी होने से अंडे और चिकन का उत्पादन खर्च बढ़ गया है. इसका सीधा असर बाजार की कीमतों पर पड़ रहा है.

अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, पोल्ट्री फीड की कीमत बढ़ने के पीछे मक्का और सोयाबीन  की अहम भूमिका है. मक्का मुर्गियों को ऊर्जा देता है, जबकि सोयाबीन मील प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है. पोल्ट्री फीड में मक्के की हिस्सेदारी करीब 55-60 फीसदी होती है. ऐसे में इन दोनों की कीमत बढ़ने का सीधा असर अंडे और चिकन के उत्पादन खर्च पर पड़ता है. इस साल पोल्ट्री फीड की कीमत में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसकी कीमत एक साल पहले करीब 3,600 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 4,400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई है. वहीं, सोयाबीन मील का भाव करीब 62,000-65,000 रुपये प्रति टन बना हुआ है.

इथेनॉल कंपनियों की बढ़ी मांग से मक्का महंगा

इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, नई सोयाबीन फसल आने से पहले करीब 15 लाख टन की कमी रह सकती है. इससे फीड की कीमतों पर दबाव बना रहने और अंडे-चिकन के उत्पादन खर्च में और बढ़ोतरी की आशंका है. साथ ही अंडे और चिकन की बढ़ती कीमतों के पीछे सिर्फ मक्के का कम उत्पादन ही वजह नहीं है. मक्के की मांग अब इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों की ओर से भी बढ़ रही है. इससे बाजार में उपलब्ध मक्के पर दबाव बढ़ गया है और पोल्ट्री फीड बनाने की लागत बढ़ रही है.

मक्का महंगा होते ही बढ़ती है पोल्ट्री फीड की लागत

मक्का महंगा होने पर फीड कंपनियां कीमतें बढ़ा देती हैं. इसका सीधा असर पोल्ट्री किसानों  की लागत पर पड़ता है. मुर्गियां पालने और अंडे का उत्पादन करने में खर्च बढ़ जाता है. अगर किसानों को उनकी उपज का बेहतर भाव नहीं मिलता है तो उनका मुनाफा कम हो जाता है. ऐसे में किसान उत्पादन घटा सकते हैं या बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकते हैं. दोनों ही स्थिति में अंडे और चिकन की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं.

सोयाबीन की कमी से भी बढ़ा दबाव

पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाले सोयाबीन मील की सप्लाई भी चिंता का कारण बनी हुई है. सोयाबीन उत्पादन में कमी और बारिश को लेकर अनिश्चितता से इसकी उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ा है. इससे पोल्ट्री किसानों की लागत बढ़ रही है और उनका मुनाफा घट रहा है. बढ़ती लागत और कम मुनाफे के बीच जून में ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन ने कहा था कि इंडस्ट्री का एक बड़ा हिस्सा उत्पादन में करीब 25 फीसदी तक कटौती करने की योजना बना रहा है. सोयाबीन मील की बढ़ती कीमतों को इसके पीछे प्रमुख वजह बताया गया था.

गर्मी और अनियमित बारिश ने बढ़ाई परेशानी

पोल्ट्री सेक्टर पर सिर्फ फीड महंगी होने का असर नहीं है. लंबी गर्मी और अनियमित बारिश ने भी मुर्गियों की उत्पादकता और मक्का-सोयाबीन जैसी फसलों की पैदावार को प्रभावित किया है. ज्यादा गर्मी में मुर्गियों पर तनाव बढ़ता है, जिससे वे कम फीड खाती हैं और उनके वजन बढ़ने और अंडा उत्पादन पर असर पड़ सकता है. इसका असर बाजार में भी दिखाई दिया. जुलाई में हैदराबाद में फार्म से निकलने वाले अंडों की कीमत एक महीने में करीब 15 फीसदी और सालाना आधार पर लगभग 40 फीसदी बढ़ी. कई बाजारों में खुदरा अंडे का भाव 8.50 से 9 रुपये प्रति अंडा तक पहुंच गया. वहीं, तेज गर्मी से ब्रॉयलर उत्पादन प्रभावित होने के कारण चिकन की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई.

भारत में 149 अरब से ज्यादा अंडों का उत्पादन

पशुपालन और डेयरी विभाग के मुताबिक, भारत में 2024-25 के दौरान 149.11 अरब अंडों का उत्पादन  हुआ. इसमें कमर्शियल पोल्ट्री फार्म की हिस्सेदारी 84.49 फीसदी रही. ऐसे में पोल्ट्री सेक्टर की लागत में मामूली बदलाव का असर भी देशभर के खाद्य बाजार पर पड़ सकता है. अंडे और चिकन की मौजूदा महंगाई के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. इनमें महंगी पोल्ट्री फीड, मक्के की बढ़ती मांग, सोयाबीन मील की सीमित सप्लाई, खराब मौसम और कुछ जगहों पर कम उत्पादन शामिल हैं. इसका सीधा असर ग्राहकों पर अंडे और चिकन की बढ़ी कीमतों के रूप में दिखाई दे रहा है.

फीड महंगी रहने तक अंडे-चिकन के दाम पर दबाव

वहीं, पोल्ट्री किसानों के लिए महंगाई की असली शुरुआत मुर्गियों को खिलाने वाले फीड की बढ़ती लागत से होती है. जब तक फीड की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और मक्का-सोयाबीन की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम नहीं होतीं, तब तक अंडे और चिकन की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है. यह स्थिति यह भी दिखाती है कि देश में मिलने वाले सस्ते प्रोटीन की कीमतें मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों के बाजार से कितनी गहराई से जुड़ी हैं.

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