खाद कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 54 विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द.. 786 सस्पेंड

महाराष्ट्र में खरीफ सीजन से पहले खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. पिछले पांच हफ्तों में 54 खाद विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द और 786 सस्पेंड किए गए हैं. जांच में किसानों के नाम पर फर्जी यूरिया बिक्री और स्टॉक छिपाने के मामले सामने आए हैं.

नोएडा | Updated On: 11 May, 2026 | 10:30 AM

Maharashtra News: महाराष्ट्र में खरीफ सीजन की बुवाई से पहले खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है. साथ ही सब्सिडी वाली यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल करने वालों पर एक्शन चालू हो गया है. कृषि विभाग ने पिछले पांच हफ्तों में 54 खाद विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए, जबकि 786 लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं. अभी खाद की कालाबाजारी के खिलाफ जांच अभियान जारी है. यानी आगे भी इस तरह की कार्रवाई होती रहेगी.

कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रण और इनपुट निदेशक सुनील बोरकर ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा है कि जांच के दौरान अधिकारियों ने ज्यादा मात्रा में हुई यूरिया बिक्री की जांच की. इसमें पाया गया कि कई किसानों ने इतनी मात्रा में खाद खरीदी ही नहीं की थी. कई मामलों में दुकानदारों ने खुद खाद स्टॉक कर ली और किसानों के नाम पर फर्जी बिक्री दिखा दी. उन्होंने कहा कि नियमों के गंभीर उल्लंघन के चलते लाइसेंस सस्पेंड और रद्द किए गए हैं.

तीन महीने तक लाइसेंस निलंबित

सुनील बोरकर ने कहा कि नियम उल्लंघन की देनदारी के आधार पर लाइसेंस निलंबन  की अवधि 15 दिन से लेकर तीन महीने तक रखी गई है. वहीं, खाद की कालाबाजारी या फर्जी एंट्री जैसे गंभीर मामलों में लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सब्सिडी वाली यूरिया की कीमत करीब 5 से 6 रुपये प्रति किलो है, जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 50 रुपये प्रति किलो से ज्यादा है. यूरिया का इस्तेमाल रेजिन, चिपकाने वाले पदार्थ, कपड़ा और दवा उद्योगों में भी बड़े स्तर पर किया जाता है.

सब्सिडी वाली यूरिया की जांच शुरू

केंद्र सरकार के इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) से अलर्ट मिलने के बाद राज्य में सब्सिडी वाली यूरिया की बिक्री  की बड़े स्तर पर जांच शुरू की गई. यह डिजिटल सिस्टम देशभर में खाद की सप्लाई और बिक्री पर नजर रखता है. कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, किसानों के नाम पर जरूरत से ज्यादा यूरिया खरीद के 16 हजार से अधिक संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है. खासतौर पर उन लेन-देन को चिन्हित किया गया है, जिनमें एक किसान के नाम पर 20 या उससे ज्यादा यूरिया की बोरियां खरीदी गईं.

जरूरत से कहीं ज्यादा खाद की खरीदी

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि कई जगह किसानों के नाम पर जरूरत से कहीं ज्यादा खाद की खरीद दर्ज की गई है. ऐसे मामलों में अब जमीन स्तर पर विस्तार से जांच की जा रही है. विभाग ने फिलहाल किसानों पर सीधे सख्त कार्रवाई करने से बचाव रखा है. सुनील बोरकर ने कहा कि अगर शुरुआत में ही किसानों पर कड़ी कार्रवाई की गई, तो वे सरकारी खाद वितरण प्रणाली से जुड़ने में हिचक सकते हैं. इसलिए अभी विभाग का मुख्य फोकस नियम तोड़ने वाले दुकानदारों और वितरकों पर है. उन्होंने कहा कि अगर जांच में संगठित मिलीभगत के सबूत मिले, तो पुलिस कार्रवाई भी की जा सकती है.

यूरिया की मांग बढ़ना सामान्य बात

किसान संगठनों का कहना है कि यह मामला खाद वितरण व्यवस्था की कमियों और समय पर सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को दिखाता है. सोलापुर के किसान नेता प्रमोद कापसे ने कहा कि मराठवाड़ा में किसान कई वर्षों से खाद की कमी का सामना कर रहे हैं. मॉनसून शुरू होते ही खाद की मांग  अचानक बढ़ जाती है और इसकी उपलब्धता को लेकर डर बना रहता है. अधिकारियों के मुताबिक, खरीफ सीजन से पहले और बुवाई के दौरान यूरिया की मांग बढ़ना सामान्य बात है. लेकिन इस बार कई इलाकों में बुवाई शुरू होने से पहले ही बड़ी मात्रा में खाद की खरीद दर्ज हुई, जिसे असामान्य माना जा रहा है.

 

Published: 11 May, 2026 | 10:25 AM

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