World Air Quality Report 2025: आज के समय में साफ हवा में सांस लेना भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. हाल ही में आई वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश बन गया है, जबकि भारत छठे स्थान पर है.
यह रिपोर्ट स्विट्जरलैंड की कंपनी IQAir ने जारी की है, जिसमें दुनिया के 143 देशों और 9,446 शहरों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है.
लोनी बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
इस रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश का लोनी शहर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है. यहां हवा में PM2.5 का स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है. यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तय सीमा से करीब 22 गुना ज्यादा है. यानी यहां की हवा लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है. वहीं, देश की राजधानी नई दिल्ली भी इस सूची में चौथे नंबर पर है, जो चिंता बढ़ाने वाली बात है.
भारत के 5 शहर टॉप 10 में शामिल
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के 5 शहर शामिल हैं. इनमें लोनी, गाजियाबाद, असम का बर्नीहाट, नई दिल्ली और पश्चिम बंगाल का उला शामिल हैं. यह साफ दिखाता है कि देश के कई बड़े शहरों में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है.

लोनी बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, pc-AI
सबसे ज्यादा प्रदूषित देश कौन-कौन
सबसे प्रदूषित देशों की सूची में पाकिस्तान पहले नंबर पर है. इसके बाद बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और कांगो का नाम आता है. भारत इस सूची में छठे स्थान पर है, जो बताता है कि यहां भी प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुका है.

दुनिया के सबसे प्रदूषित देश, pc-AI
दुनिया में क्या है हाल
रिपोर्ट के मुताबिक 54 देशों में प्रदूषण बढ़ा है, जबकि 75 देशों में इसमें कमी आई है. वहीं 2 देशों में कोई बदलाव नहीं हुआ और 12 नए देश इस रिपोर्ट में शामिल किए गए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि दुनिया के केवल 14 प्रतिशत शहर ही WHO के मानकों पर खरे उतर पाए हैं. यानी ज्यादातर शहरों में हवा अभी भी सुरक्षित नहीं है.
जंगलों की आग और क्लाइमेट चेंज का असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज भी प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह है. कनाडा और यूरोप में लगी जंगलों की आग से भारी मात्रा में धुआं और कार्बन हवा में फैला. करीब 1,380 मेगाटन कार्बन का उत्सर्जन हुआ, जिससे कई देशों में हवा और खराब हो गई. इसके अलावा फैक्ट्रियों का धुआं और धूल के कण भी प्रदूषण बढ़ा रहे हैं.
अमेरिका और यूरोप भी नहीं बचे
प्रदूषण का असर सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं है. अमेरिका में भी PM2.5 का स्तर बढ़कर 7.3 µg/m³ हो गया है. वहां एल पासो सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि सिएटल सबसे साफ शहर बना. यूरोप के 23 देशों में प्रदूषण बढ़ा है, जबकि 18 देशों में इसमें सुधार देखने को मिला है.
निगरानी की कमी भी बड़ी समस्या
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई देशों में हवा की निगरानी सही तरीके से नहीं हो रही है. मार्च 2025 में अमेरिका का एक बड़ा मॉनिटरिंग प्रोग्राम बंद हो गया, जिससे कई देशों में डेटा की कमी हो गई. करीब 44 देशों में मॉनिटरिंग कमजोर हो गई है और 6 देशों में तो कोई सिस्टम ही नहीं है.
भारत में पहले से ही गंभीर हालात
2024 की रिपोर्ट में भारत दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश था.उस समय देश में पीएम2.5 का स्तर 50.6 µg/m³ दर्ज किया गया था, जो WHO की सीमा से 10 गुना ज्यादा था. दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बताया गया था और दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 भारत के थे.