चीनी की कीमतों को लेकर मिलों और कारोबारियों के बीच खींचतान बढ़ गई है. सोमवार को मिलों ने बिक्री भाव ऊंचे रखे, जबकि थोक बाजार में कीमतें गिर गईं. खुदरा बाजार में चीनी का भाव करीब 60 रुपये प्रति किलो बना रहा. त्योहारी सीजन में कीमत बढ़ने की उम्मीद में कारोबारियों ने बड़ी मात्रा में चीनी खरीदी थी, लेकिन मांग कमजोर रहने से उनकी रणनीति उलटी पड़ गई. अब मिलों पर 7 सितंबर तक तय 40 फीसदी स्टॉक बेचने का दबाव है, लेकिन इसके लिए उन्हें कीमत घटानी पड़ सकती है.
चेन्नई के एक चीनी कारोबारी के मुताबिक, कुछ चीनी मिलों ने मौजूदा स्थिति का फायदा उठाकर कीमतों में करीब 2 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी. कारोबारी ने कहा कि मिलें अपनी मनमानी कीमतें तय कर रही हैं, जबकि कारोबारियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है. सोमवार को चीनी मिलों ने अपनी बिक्री दरें ऊंची रखीं. वहीं, लॉजिस्टिक्स की समस्या ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है. एक उद्योग सूत्र के मुताबिक, पहली पखवाड़े के लिए आवंटित चीनी उठाने के लिए अब सिर्फ दो दिन बचे हैं. ऐसे में वाहनों की कमी से चीनी उठाव का संकट बढ़ गया है.
खुदरा चीनी 61.09 रुपये किलो पहुंची
सोमवार को चीनी मिलों ने S-30 ग्रेड की चीनी का भाव करीब 4,500 रुपये प्रति क्विंटल रखा. वहीं, थोक बाजार में चीनी की कीमत 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक घट गई. मुंबई में थोक भाव गिरकर करीब 4,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गया. उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग डिविजन के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत बढ़कर 61.09 रुपये प्रति किलो हो गई. रविवार को यह 60.80 रुपये प्रति किलो थी. हालांकि, एक सप्ताह पहले के मुकाबले कीमत अभी भी 2 रुपये से ज्यादा कम है.
10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की मंजूरी
वहीं, खुदरा बाजार में चीनी का भाव 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया था. इसके बाद सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी. इसके अलावा सरकार ने कई कदम उठाए. इनमें मासिक बिक्री कोटा बदलकर पखवाड़े के हिसाब से करना, कारोबारियों और थोक खरीदारों के स्टॉक की अधिकतम सीमा घटाना, मिलों से खरीदारों की जानकारी लेना और चीनी की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाना शामिल है. पखवाड़े की बिक्री व्यवस्था के तहत मिलों को आवंटित कोटे की 40 फीसदी चीनी पहले सप्ताह में बेचनी होती है. बाकी 60 फीसदी चीनी दूसरे सप्ताह में बेचनी होती है.
त्योहारी सीजन से कई हफ्ते पहले चीनी कारोबारियों ने कीमतें बढ़ने की उम्मीद में बड़ी मात्रा में स्टॉक खरीद लिया था. लेकिन उनकी उम्मीद गलत साबित हुई. मांग कमजोर रहने के कारण त्योहारी सीजन में चीनी की बिक्री नहीं बढ़ी. कीमतों में गिरावट के बीच कारोबारियों के पास महंगे भाव पर खरीदा गया स्टॉक बचा हुआ है. इससे उन्हें नुकसान होने का डर है. अब कारोबारी कम कीमत पर चीनी खरीदकर अपने पुराने स्टॉक से होने वाले नुकसान की भरपाई की उम्मीद कर रहे हैं.
ग्लोबल मार्केट में भी चीनी के भाव गिरे
उद्योग से जुड़े सूत्र के मुताबिक, अगर चीनी मिलों ने कीमतों में थोड़ी कटौती नहीं की तो वे 40 फीसदी बिक्री कोटा पूरा नहीं कर पाएंगी. इससे मिलों की कार्यशील पूंजी पर असर पड़ सकता है. ऐसे में कीमत में मामूली कटौती करना लंबे समय में मिलों के लिए कम महंगा साबित हो सकता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्ची चीनी की वायदा और हाजिर कीमतों में गिरावट आई. न्यूयॉर्क के इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज में अक्टूबर डिलीवरी की कच्ची चीनी का वायदा भाव घटकर 18.07 सेंट प्रति पाउंड रह गया. हाजिर भाव 18.02 सेंट प्रति पाउंड रहा. वहीं, लंदन में अक्टूबर डिलीवरी वाली सफेद चीनी का भाव 523.90 डॉलर प्रति टन रहा.