राजस्थान का ‘व्हाइट गोल्ड’ क्यों बन रहा लोगों की पहली पसंद? सेहत के साथ पशुपालकों को भी कर रहा मालामाल

Camel Milk Benefits: रेगिस्तान में जब तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाता है और इंसानों से लेकर जानवरों तक के लिए हालात मुश्किल हो जाते हैं, तब भी एक ऐसा पशु है जो न सिर्फ इस गर्मी को झेलता है बल्कि पोषण से भरपूर दूध भी देता है. हम बात कर रहे हैं ऊंटनी की, जिसके दूध को आज ‘राजस्थान का व्हाइट गोल्ड’ कहा जा रहा है. विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन जैसे कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर ऊंटनी का दूध जहां लोगों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, वहीं इसकी बढ़ती मांग पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने का नया जरिया भी बन रही है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 22 Jun, 2026 | 06:45 PM
1 / 6राजस्थान का ‘व्हाइट गोल्ड’ कहलाने वाला ऊंटनी का दूध इन दिनों चर्चा में है. थार के बाड़मेर, जैसलमेर और आसपास के रेगिस्तानी इलाकों में सदियों से इसका उपयोग होता आ रहा है. अब बढ़ती मांग के कारण यह पशुपालकों के लिए कमाई का अच्छा जरिया भी बनता जा रहा है.

राजस्थान का ‘व्हाइट गोल्ड’ कहलाने वाला ऊंटनी का दूध इन दिनों चर्चा में है. थार के बाड़मेर, जैसलमेर और आसपास के रेगिस्तानी इलाकों में सदियों से इसका उपयोग होता आ रहा है. अब बढ़ती मांग के कारण यह पशुपालकों के लिए कमाई का अच्छा जरिया भी बनता जा रहा है.

2 / 6भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में भी ऊंटनी दूध उत्पादन जारी रखती है. जहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, वहां भी ऊंटनी पौष्टिक दूध देती है. यही वजह है कि रेगिस्तानी क्षेत्रों में इसे बेहद उपयोगी पशु माना जाता है.

भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में भी ऊंटनी दूध उत्पादन जारी रखती है. जहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, वहां भी ऊंटनी पौष्टिक दूध देती है. यही वजह है कि रेगिस्तानी क्षेत्रों में इसे बेहद उपयोगी पशु माना जाता है.

3 / 6ऊंटनी का दूध कई जरूरी पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है. इसमें विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और प्रोटीन जैसे तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं.

ऊंटनी का दूध कई जरूरी पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है. इसमें विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और प्रोटीन जैसे तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं.

4 / 6स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच ऊंटनी के दूध की लोकप्रियता बढ़ रही है. इसमें वसा (फैट) की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह दूध डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है.

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच ऊंटनी के दूध की लोकप्रियता बढ़ रही है. इसमें वसा (फैट) की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह दूध डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है.

5 / 6राजस्थान में ऊंटों की कई खास नस्लें पाई जाती हैं. इनमें नाचना और गोमठ नस्ल सबसे प्रमुख हैं. नाचना नस्ल के ऊंट तेज दौड़ने और सवारी के लिए जाने जाते हैं, जबकि गोमठ नस्ल के ऊंट खेती और भार ढोने के काम में उपयोग किए जाते हैं.

राजस्थान में ऊंटों की कई खास नस्लें पाई जाती हैं. इनमें नाचना और गोमठ नस्ल सबसे प्रमुख हैं. नाचना नस्ल के ऊंट तेज दौड़ने और सवारी के लिए जाने जाते हैं, जबकि गोमठ नस्ल के ऊंट खेती और भार ढोने के काम में उपयोग किए जाते हैं.

6 / 6ऊंट संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार विशेष आर्थिक सहायता दे रही है. राजस्थान सरकार की ‘उष्ट विकास योजना’ के तहत ऊंटनी के बच्चे के जन्म पर पशुपालकों को 20,000 रुपये की मदद दी जाती है. साथ ही ऊंटों की घटती संख्या को रोकने के लिए उनके राज्य से बाहर परिवहन और खरीद-फरोख्त पर भी रोक लगाई गई है.

ऊंट संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार विशेष आर्थिक सहायता दे रही है. राजस्थान सरकार की ‘उष्ट विकास योजना’ के तहत ऊंटनी के बच्चे के जन्म पर पशुपालकों को 20,000 रुपये की मदद दी जाती है. साथ ही ऊंटों की घटती संख्या को रोकने के लिए उनके राज्य से बाहर परिवहन और खरीद-फरोख्त पर भी रोक लगाई गई है.

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Published: 22 Jun, 2026 | 06:45 PM

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