Tip Of The Day: ड्रैगन फ्रूट किसानों के लिए बड़ा अलर्ट! जून में ये बीमारी चुपचाप बर्बाद कर सकती है पूरी फसल
Dragon Fruit Farming Tips: ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के लिए कमाई का शानदार जरिया बन रही है, लेकिन जून का मौसम इस फसल के लिए बड़ी चुनौती लेकर आता है. बढ़ती नमी, गर्मी और बीच-बीच में होने वाली बारिश के कारण फंगस जनित रोग तेजी से फैलने लगते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही से पौधे सड़ सकते हैं, फल खराब हो सकते हैं और पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. ऐसे में किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस मौसम में कौन-सी बीमारियां फसल पर हमला करती हैं.

उत्तर प्रदेश समेत कई शहरों में किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. कम पानी में अच्छी पैदावार और बाजार में मजबूत मांग के कारण यह फसल किसानों को बेहतर मुनाफा दे रही है. सरकार भी इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए अनुदान उपलब्ध करा रही है.

जून में बढ़ती नमी, गर्मी और हल्की बारिश ड्रैगन फ्रूट की फसल में फंगस जनित रोगों का खतरा बढ़ा देती है. यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है और पूरे बाग को नुकसान पहुंचा सकता है.

इस मौसम में ड्रैगन फ्रूट के पौधों में स्टेम रॉट, एन्थ्रेक्नोज, ब्राउन स्पॉट और सॉफ्ट रॉट जैसी बीमारियां देखने को मिलती हैं. इन रोगों के कारण पौधों की शाखाओं पर काले या भूरे धब्बे बनने लगते हैं, जो बाद में सड़न का रूप ले सकते हैं.

खेत में पानी रुकने या पौधों के बीच पर्याप्त दूरी न होने पर फंगस तेजी से फैलता है. लगातार नमी बने रहने से रोग का प्रकोप और बढ़ जाता है. इसलिए खेत की साफ-सफाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था करना बेहद जरूरी है.

तनों पर भूरे धब्बे, शाखाओं का नरम पड़ना, पानी जैसा रिसाव, फलों पर गोल दाग और समय से पहले सड़न फंगस संक्रमण के प्रमुख संकेत हैं. किसान यदि शुरुआती अवस्था में ही इन लक्षणों को पहचान लें तो बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है.

ऑक्सीक्लोराइड, कार्बेन्डाजिम, मैनकोजेब और मेटालेक्सिल आधारित फफूंदनाशक दवाओं का सही मात्रा में छिड़काव फंगस नियंत्रण में मदद करता है. दवा का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना अधिक प्रभावी माना जाता है, जिससे फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.