बरसात में पशुओं पर मंडरा रहा बीमारी का खतरा, खुरपका-मुंहपका से बचाने के 6 जरूरी उपाय
FMD In Cattle: बरसात का मौसम इंसानों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी कई तरह की बीमारियां लेकर आता है. अगर इस समय थोड़ी सी भी लापरवाही हुई, तो पशु गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं और पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, कुछ आसान सावधानियां अपनाकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है.

बरसात में पशुओं को खुले में या बारिश में बांधकर न रखें. उनके लिए ऐसा शेड बनाएं, जहां छत से पानी न टपके और फर्श हमेशा सूखा रहे. गीली और नम जगहों पर बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे वायरल बुखार और अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

बारिश के मौसम में केवल हरा चारा खिलाना पर्याप्त नहीं होता. पशुओं के आहार में सूखा चारा भी मिलाएं और मिनरल मिक्सचर जरूर दें. इसमें जिंक, कॉपर, मैग्नीशियम और थोड़ा सादा नमक मिलाने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पैरों की सड़न व लंगड़ापन जैसी समस्याओं से बचाव होता है.

बरसात में गंदा या जमा हुआ पानी कई बीमारियों की वजह बन सकता है. इसलिए पशुओं को हमेशा साफ और ताजा पानी ही पिलाएं. इससे पाचन संबंधी समस्याएं और संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है.

बरसात के मौसम में खुरपका-मुंहपका, थनैला और अन्य संक्रामक रोग तेजी से फैलते हैं. इसलिए पशुओं का समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है. बीमारी होने का इंतजार करने के बजाय पहले से बचाव करना सबसे बेहतर उपाय माना जाता है.

बारिश में पशुओं के थन अक्सर कीचड़ और गीली मिट्टी के संपर्क में रहते हैं. ऐसे में दूध निकालने से पहले थनों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कपड़े से पोंछ लें. इससे थनैला जैसी बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है और दूध की गुणवत्ता भी बनी रहती है.

बरसात के दौरान पशुओं के शरीर पर पिस्सू, टिक्स और दूसरे परजीवी तेजी से बढ़ते हैं. ये पशुओं का खून चूसते हैं और कई बीमारियां फैलाते हैं. पशु चिकित्सक की सलाह लेकर समय-समय पर कीटनाशक दवाओं या स्प्रे का इस्तेमाल करें, ताकि पशु पूरे मौसम स्वस्थ और सुरक्षित रहें.