कम लागत, जबरदस्त मुनाफा! मूंगफली की खेती ने बदली किसानों की जिंदगी… 90 दिन में बन रहे मालामाल

Moongfali Ki Kheti: मूंगफली की खेती आज किसानों के लिए सिर्फ एक पारंपरिक फसल नहीं, बल्कि कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला मजबूत विकल्प बनती जा रही है. देश के कई राज्यों में किसान अब इसकी आधुनिक खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और तेज कमाई कर रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि, सही समय, सही तकनीक और उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से यह फसल सिर्फ 3 से 4 महीने में तैयार होकर किसानों की आय को नई दिशा दे सकती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 13 Apr, 2026 | 06:00 AM
1 / 6अब मूंगफली सिर्फ कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में किसान इसे बड़े स्तर पर अपना रहे हैं. यह फसल कम लागत में अच्छा मुनाफा देने के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

अब मूंगफली सिर्फ कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में किसान इसे बड़े स्तर पर अपना रहे हैं. यह फसल कम लागत में अच्छा मुनाफा देने के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

2 / 6मूंगफली की बुवाई मुख्य रूप से खरीफ सीजन (जून–जुलाई) में होती है, लेकिन सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में इसे गर्मियों में भी लगाया जा सकता है. सही तकनीक अपनाकर किसान अलग-अलग राज्यों में अलग समय पर इसकी खेती कर सकते हैं.

मूंगफली की बुवाई मुख्य रूप से खरीफ सीजन (जून–जुलाई) में होती है, लेकिन सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में इसे गर्मियों में भी लगाया जा सकता है. सही तकनीक अपनाकर किसान अलग-अलग राज्यों में अलग समय पर इसकी खेती कर सकते हैं.

3 / 6मूंगफली लगभग 90 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है. यह शॉर्ट ड्यूरेशन क्रॉप होने के कारण किसानों को जल्दी नकद आय देती है, जिससे वे अगली फसल की तैयारी भी आसानी से कर पाते हैं.

मूंगफली लगभग 90 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है. यह शॉर्ट ड्यूरेशन क्रॉप होने के कारण किसानों को जल्दी नकद आय देती है, जिससे वे अगली फसल की तैयारी भी आसानी से कर पाते हैं.

4 / 6मूंगफली के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है, लेकिन अच्छे जल निकास वाली हल्की से मध्यम मिट्टी में भी इसकी खेती सफल हो सकती है. खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, वरना फसल खराब हो सकती है.

मूंगफली के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है, लेकिन अच्छे जल निकास वाली हल्की से मध्यम मिट्टी में भी इसकी खेती सफल हो सकती है. खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, वरना फसल खराब हो सकती है.

5 / 6बेहतर पैदावार के लिए कतार से कतार की दूरी लगभग 25-30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 8-10 सेमी रखनी चाहिए. बीज को सही गहराई पर बोना और बीज उपचार करना फसल को रोगों से बचाता है और अंकुरण बेहतर करता है.

बेहतर पैदावार के लिए कतार से कतार की दूरी लगभग 25-30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 8-10 सेमी रखनी चाहिए. बीज को सही गहराई पर बोना और बीज उपचार करना फसल को रोगों से बचाता है और अंकुरण बेहतर करता है.

6 / 6समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण बहुत जरूरी है. साथ ही उन्नत किस्में जैसे TG-37A, JL-501, GG-20 और अन्य स्थानीय विकसित वैरायटी अपनाकर किसान प्रति हेक्टेयर बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ कमा सकते हैं.

समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण बहुत जरूरी है. साथ ही उन्नत किस्में जैसे TG-37A, JL-501, GG-20 और अन्य स्थानीय विकसित वैरायटी अपनाकर किसान प्रति हेक्टेयर बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ कमा सकते हैं.

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Published: 13 Apr, 2026 | 06:00 AM
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