Biogas Energy: देश में स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अब गांवों में बायोगैस को तेजी से प्रोत्साहित किया जा रहा है. पशुपालन और डेयरी विभाग ने लोगों से गोबर का सही उपयोग कर बायोगैस और जैविक खाद बनाने की अपील की है. विभाग का कहना है कि इससे रसोई गैस की बचत होगी, गांवों में स्वच्छता बढ़ेगी और किसानों को अतिरिक्त आय का नया साधन भी मिलेगा. मिशन लाइफ (Mission LiFE) यानी पर्यावरण के लिए जीवनशैली (Lifestyle for Environment) अभियान के तहत लोगों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है.
गोबर से तैयार होगी स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा
पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार गांवों में उपलब्ध गोबर का उपयोग बायोगैस बनाने में किया जा सकता है. इससे घरों में खाना बनाने के लिए स्वच्छ गैस मिलती है और एलपीजी सिलेंडर (LPG) पर खर्च कम होता है. विभाग का कहना है कि बायोगैस पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है, क्योंकि इससे धुआं और प्रदूषण कम फैलता है. ग्रामीण परिवार अगर छोटे स्तर पर भी बायोगैस प्लांट लगाते हैं तो उन्हें लंबे समय तक फायदा मिल सकता है.
जैविक खाद से खेती को मिलेगा बड़ा लाभ
बायोगैस प्लांट से निकलने वाला अवशेष जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह खाद खेतों की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करती है. विभाग का कहना है कि जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और फसल उत्पादन में भी सुधार देखा जाता है. इससे किसानों की लागत कम होती है और खेती ज्यादा लाभकारी बनती है.
गांवों में बढ़ेगी स्वच्छता और रोजगार के अवसर
गोबर और पशु अपशिष्ट का सही उपयोग होने से गांवों में गंदगी कम होगी और स्वच्छता बनी रहेगी. खुले में गोबर जमा रहने से फैलने वाली बदबू और बीमारियों का खतरा भी कम होगा. विभाग का मानना है कि बायोगैस परियोजनाओं के जरिए गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़ सकते हैं. कई किसान जैविक खाद बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
मिशन लाइफ के जरिए पर्यावरण संरक्षण पर फोकस
मिशन लाइफ अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना है. सरकार चाहती है कि लोग ऐसी जीवनशैली अपनाएं जिससे प्रकृति को कम नुकसान पहुंचे. पशुपालन और डेयरी विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे स्वच्छ ऊर्जा अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें. विभाग का कहना है कि अगर गांवों में बड़े स्तर पर बायोगैस को अपनाया जाए तो इससे स्वच्छ भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी और गांव आत्मनिर्भर बन सकेंगे.