किसान ध्यान दें! धान की नर्सरी में ये 6 गलतियां पड़ सकती हैं भारी, फसल की पैदावार हो सकती है आधी
Dhan Ki Kheti: मानसून की पहली बारिश के साथ ही किसानों के खेतों में हलचल बढ़ जाती है और धान की नर्सरी तैयार करने का काम शुरू हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि धान की अच्छी पैदावार की नींव नर्सरी में ही पड़ जाती है? अगर शुरुआत में थोड़ी सी लापरवाही हो जाए, तो बाद में फसल रोग, कीट और कमजोर पौधों की समस्या से जूझना पड़ सकता है. ऐसे में आइए जानते कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार से कि, धान की नर्सरी तैयार करते समय किन 6 जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

धान की नर्सरी तैयार करने से पहले बीजों का उपचार करना बेहद जरूरी है. बीजोपचार करने से बीज जनित रोगों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और अंकुरण क्षमता बेहतर होती है. इससे पौधे शुरू से ही स्वस्थ और मजबूत बनते हैं, जिसका सीधा असर बाद में फसल की पैदावार पर पड़ता है.

बीज बोने के बाद पहले 3 से 5 दिनों तक क्यारियों में पानी भरने की जरूरत नहीं होती. इस दौरान केवल मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है. अधिक पानी देने से बीज सड़ सकते हैं और अंकुरण प्रभावित हो सकता है.

जब पौधे 1 से 2 इंच तक बढ़ जाएं, तब क्यारियों में लगभग 1 से 1.5 सेंटीमीटर पानी बनाए रखना चाहिए. ध्यान रखें कि खेत में ज्यादा पानी जमा न हो और मिट्टी पूरी तरह सूखने भी न पाए. संतुलित सिंचाई से पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं.

धान की नर्सरी में उगने वाले खरपतवार पौधों के लिए जरूरी पानी, खाद और पोषक तत्वों को सोख लेते हैं. इससे नर्सरी कमजोर पड़ सकती है. इसलिए किसानों को नियमित रूप से निरीक्षण कर खरपतवारों को हटाते रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह से खरपतवारनाशी का उपयोग करना चाहिए.

नर्सरी में किसी भी प्रकार के रोग या कीट का शुरुआती स्तर पर पता लगाना बेहद जरूरी है. अगर पत्तियां पीली पड़ने लगें, पौधे सूखने लगें या कीटों का हमला दिखाई दे, तो तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए. समय पर कार्रवाई करने से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बीजोपचार, उचित सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और रोग-कीट प्रबंधन जैसी छोटी-छोटी सावधानियां ही मजबूत नर्सरी की नींव रखती हैं. स्वस्थ नर्सरी से रोपाई के समय बेहतर पौधे मिलते हैं और अंततः किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त होता है.