फूल तो खूब आ रहे हैं, लेकिन फल क्यों नहीं? परवल किसान अभी करें एक्सपर्ट के बताए ये उपाय

Parval Ki Kheti: क्या आपके परवल के खेत में भी फूलों की भरमार होती है, लेकिन फल गिनती के ही निकलते हैं? अगर हां, तो समझ लीजिए आप अकेले नहीं हैं. बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, इस समस्या के पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं. अच्छी बात ये है कि अगर इन कारणों को सही तरीके से समझ लिया जाए, तो परवल की पैदावार में 40 से 70 फीसगी तक बढ़ोतरी संभव है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 17 Apr, 2026 | 06:00 AM
1 / 6परवल की खेती में यह एक आम समस्या है कि पौधों पर फूल तो बहुत आते हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम ही फल बन पाते हैं. इससे किसानों की मेहनत और लागत के बावजूद उत्पादन उम्मीद से कम रह जाता है. असल में यह समस्या सिर्फ खेती के तरीके की नहीं, बल्कि कई वैज्ञानिक कारणों से जुड़ी होती है.

परवल की खेती में यह एक आम समस्या है कि पौधों पर फूल तो बहुत आते हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम ही फल बन पाते हैं. इससे किसानों की मेहनत और लागत के बावजूद उत्पादन उम्मीद से कम रह जाता है. असल में यह समस्या सिर्फ खेती के तरीके की नहीं, बल्कि कई वैज्ञानिक कारणों से जुड़ी होती है.

2 / 6परवल की खासियत यह है कि इसके नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर उगते हैं. यदि खेत में नर पौधे ज्यादा और मादा पौधे कम हो जाएं, तो परागण ठीक से नहीं हो पाता. इसका सीधा असर फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है और उत्पादन घट जाता है. इसलिए सही अनुपात बनाए रखना बेहद जरूरी है.

परवल की खासियत यह है कि इसके नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर उगते हैं. यदि खेत में नर पौधे ज्यादा और मादा पौधे कम हो जाएं, तो परागण ठीक से नहीं हो पाता. इसका सीधा असर फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है और उत्पादन घट जाता है. इसलिए सही अनुपात बनाए रखना बेहद जरूरी है.

3 / 6परवल में फल बनने के लिए मधुमक्खियों और अन्य कीटों द्वारा परागण बेहद जरूरी होता है. लेकिन अत्यधिक कीटनाशकों का उपयोग, पर्यावरण में बदलाव और मधुमक्खियों की संख्या में कमी इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. जब परागण सही नहीं होता, तो फूल सूखकर गिर जाते हैं और फल बनने की संभावना खत्म हो जाती है.

परवल में फल बनने के लिए मधुमक्खियों और अन्य कीटों द्वारा परागण बेहद जरूरी होता है. लेकिन अत्यधिक कीटनाशकों का उपयोग, पर्यावरण में बदलाव और मधुमक्खियों की संख्या में कमी इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. जब परागण सही नहीं होता, तो फूल सूखकर गिर जाते हैं और फल बनने की संभावना खत्म हो जाती है.

4 / 6परवल की अच्छी फसल के लिए 22 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है. अगर तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाए या अचानक मौसम में बदलाव हो जाए, तो पराग की गुणवत्ता प्रभावित होती है. इससे फल बनने की क्षमता कम हो जाती है और उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है.

परवल की अच्छी फसल के लिए 22 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है. अगर तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाए या अचानक मौसम में बदलाव हो जाए, तो पराग की गुणवत्ता प्रभावित होती है. इससे फल बनने की क्षमता कम हो जाती है और उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है.

5 / 6फसल के सही विकास के लिए बोरॉन, पोटाश और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं. बोरॉन की कमी होने पर फूल कमजोर हो जाते हैं और झड़ने लगते हैं. वहीं, ज्यादा नाइट्रोजन और पोटाश की कमी भी पौधे के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देती है.

फसल के सही विकास के लिए बोरॉन, पोटाश और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं. बोरॉन की कमी होने पर फूल कमजोर हो जाते हैं और झड़ने लगते हैं. वहीं, ज्यादा नाइट्रोजन और पोटाश की कमी भी पौधे के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देती है.

6 / 6अगर किसान सही तकनीक अपनाएं, जैसे नर-मादा पौधों का संतुलन बनाए रखना, मधुमक्खी बक्सों का उपयोग, सुबह के समय हाथ से परागण, संतुलित पोषण और समय पर छिड़काव, तो उत्पादन में 40 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है.

अगर किसान सही तकनीक अपनाएं, जैसे नर-मादा पौधों का संतुलन बनाए रखना, मधुमक्खी बक्सों का उपयोग, सुबह के समय हाथ से परागण, संतुलित पोषण और समय पर छिड़काव, तो उत्पादन में 40 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है.

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Published: 17 Apr, 2026 | 06:00 AM
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