भारत की सुपरस्टार मुर्गी… प्रोटीन से भरपूर अंडे और औषधीय मांस वाली ये नस्ल किसानों के लिए बन रही ATM!

Kadaknath Poultry: भारत की देसी नस्लों में एक ऐसा ही रत्न है, जो न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है - कड़कनाथ मुर्गी. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के गांवों में पाई जाने वाली यह काली मासी जैसी मुर्गी अपनी काली त्वचा, हड्डियां और अंगों के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है. अगर आप सोच रहे हैं कि देसी मुर्गी पालन केवल मुनाफे का साधन है, तो यह नस्ल आपको अंडे, मांस और पारंपरिक दवाइयों के जरिए हर स्तर पर लाभ पहुंचा सकती है. आइए जानें इस खास मुर्गी की वो 6 अनोखी बातें, जो इसे बाकी नस्लों से अलग बनाती हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 5 Feb, 2026 | 10:20 PM
1 / 6कड़कनाथ मुर्गी भारत की सबसे खास देसी नस्ल मानी जाती है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पाई जाती है. इसकी पहचान इसका पूरे शरीर का काला या ग्रे-काला रंग है, जिसमें त्वचा, हड्डियां और अधिकांश अंग भी काले रंग के होते हैं.

कड़कनाथ मुर्गी भारत की सबसे खास देसी नस्ल मानी जाती है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पाई जाती है. इसकी पहचान इसका पूरे शरीर का काला या ग्रे-काला रंग है, जिसमें त्वचा, हड्डियां और अधिकांश अंग भी काले रंग के होते हैं.

2 / 6कड़कनाथ मुर्गियां सामान्यतः लगभग 80 अंडे प्रति साल देती हैं, जो देसी नस्लों के लिए अच्छा उत्पादन माना जाता है. यह अंडे भी प्रोटीन से भरपूर होते हैं और घरेलू उपयोग के साथ बाजार में भी बिकते हैं.

कड़कनाथ मुर्गियां सामान्यतः लगभग 80 अंडे प्रति साल देती हैं, जो देसी नस्लों के लिए अच्छा उत्पादन माना जाता है. यह अंडे भी प्रोटीन से भरपूर होते हैं और घरेलू उपयोग के साथ बाजार में भी बिकते हैं.

3 / 6कड़कनाथ के मांस का इस्तेमाल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, कई रिसर्च और पशुपालन विभाग के अनुसार इसका मांस कुछ पारंपरिक औषधियों और दवाइयों में भी उपयोग होता है, क्योंकि यह आसानी से पचने वाला और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है.

कड़कनाथ के मांस का इस्तेमाल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, कई रिसर्च और पशुपालन विभाग के अनुसार इसका मांस कुछ पारंपरिक औषधियों और दवाइयों में भी उपयोग होता है, क्योंकि यह आसानी से पचने वाला और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है.

4 / 6अन्य नस्लों की तुलना में कड़कनाथ मुर्गियां बीमारियों का सामना बेहतर तरीके से करती हैं, जिससे फार्म पर खर्च और जान जोखिम कम होता है. देसी नस्ल होने की वजह से यह स्थानीय जलवायु में जल्दी ढल जाती है.

अन्य नस्लों की तुलना में कड़कनाथ मुर्गियां बीमारियों का सामना बेहतर तरीके से करती हैं, जिससे फार्म पर खर्च और जान जोखिम कम होता है. देसी नस्ल होने की वजह से यह स्थानीय जलवायु में जल्दी ढल जाती है.

5 / 6कड़कनाथ का मांस स्वाद में अनोखा और पोषण में उच्च माना जाता है. इसमें प्रोटीन, आयरन और आवश्यक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, जो शरीर की ताकत, ऊर्जा और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए अच्छा है.

कड़कनाथ का मांस स्वाद में अनोखा और पोषण में उच्च माना जाता है. इसमें प्रोटीन, आयरन और आवश्यक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, जो शरीर की ताकत, ऊर्जा और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए अच्छा है.

6 / 6कड़कनाथ मुर्गी सिर्फ गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी लोकप्रिय है. इसका देसी स्वाद और स्वास्थ्य लाभ दोनों की वजह से इसकी मांग अंडे, मांस और पारंपरिक उत्पादों दोनों के लिए बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छी कमाई मिलती है.

कड़कनाथ मुर्गी सिर्फ गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी लोकप्रिय है. इसका देसी स्वाद और स्वास्थ्य लाभ दोनों की वजह से इसकी मांग अंडे, मांस और पारंपरिक उत्पादों दोनों के लिए बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छी कमाई मिलती है.

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Published: 5 Feb, 2026 | 10:20 PM

केला जल्दी काला क्यों पड़ जाता है?