AI से होगी बासमती धान की निगरानी, पीलीभीत में बनेगा देश का पहला बासमती-जैविक ट्रेनिंग सेंटर
AI Technology Use in Agriculture: यूपी के पीलीभीत में देश का पहला ऐसा केंद्र बनेगा जहां पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती खेती का प्रशिक्षण और प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जाएगा. एपीडा और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के सहयोग से इस परियोजना को संचालित किया जाएगा.
बासमती चावल के उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात को नई दिशा देने के लिए उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. जिले के अमरिया क्षेत्र के टांडा बिजैसी में करीब सात एकड़ भूमि पर ‘बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म’ विकसित किया जाएगा. इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद एवं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही करेंगे. स्थापित होने के बाद यह देश का पहला ऐसा केंद्र होगा, जहां पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती खेती का प्रशिक्षण और प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जाएगा.
केंद्र की स्थापना के लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), कृषि विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच 70 वर्ष के पट्टे के समझौते के माध्यम से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया गया है. केंद्र में सभागार, सम्मेलन कक्ष, प्रयोगशाला, बासमती एवं जैविक खेती पर संग्रहालय-गैलरी तथा जैविक कृषि सामग्री के भंडारण की सुविधा विकसित की जाएगी.
AI आधारित सर्वेक्षण से मिलेगी सटीक जानकारी
इस पहल के साथ भारत की पहली AI आधारित बासमती धान सर्वेक्षण परियोजना (2026-28) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. एपीडा और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के सहयोग से संचालित इस परियोजना के तहत करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया जाएगा. 1.50 लाख से अधिक जमीनी सर्वेक्षण बिंदुओं से आंकड़े जुटाने और पांच लाख से अधिक किसानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य है. इससे फसल का सटीक आकलन, बासमती की किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक परामर्श और बेहतर निर्यात योजना तैयार करने में मदद मिलेगी.
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किसानों के साथ विद्यार्थियों के लिए भी बनेगा संसाधन केंद्र
प्रस्तावित केंद्र किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के साथ कृषि विशेषज्ञों तथा विद्यार्थियों के लिए संसाधन केंद्र के रूप में भी काम करेगा. उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड के किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है. किसानों को गुणवत्तापूर्ण बासमती बीज और जैविक खेती में उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए विशेष आउटलेट बनाने का सुझाव भी दिया गया है.
केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने इस पहल की सराहना करते हुए पीलीभीत को बासमती चावल के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने किसानों की भागीदारी बढ़ाने और जैविक खेती को विस्तार देने की आवश्यकता बताई. केंद्र में AI आधारित इंटरैक्टिव संग्रहालय स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे आगंतुकों और विद्यार्थियों को आधुनिक एवं अनुभवात्मक तरीके से जानकारी मिल सके.
पीलीभीत बनेगा बासमती अनुसंधान का नया केंद्र
आगामी केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के बासमती चावल परीक्षण के लिए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) केंद्र के रूप में नामित किया गया है. इसके साथ ही पीलीभीत उत्तर प्रदेश के बासमती जीआई क्षेत्र में नगीना और मोदीपुरम के बाद तीसरा AICRP केंद्र बनेगा. यहां स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल नई बासमती किस्मों का परीक्षण और मूल्यांकन किया जा सकेगा.
भारत के जीआई टैग वाले बासमती चावल का निर्यात वर्ष 2025-26 में करीब 5.67 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि निर्यात मात्रा लगभग 65 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची. ऐसे में पीलीभीत में विकसित होने वाला यह केंद्र किसान, तकनीक, शोध, जैविक खेती और निर्यात को एक मंच पर जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. इससे तराई क्षेत्र में बासमती की गुणवत्ता बढ़ाने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं मजबूत होंगी.