खेती में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा.. खरीदने पर किसानों को मिल रही 50 फीसदी तक सब्सिडी

खेती में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को ड्रोन खरीदने पर भारी सब्सिडी दे रही है. इससे किसान कम समय में दवा छिड़काव और फसल निगरानी जैसे काम आसानी से कर सकेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन तकनीक से खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में किसानों को बड़ा फायदा मिल सकता है.

नोएडा | Updated On: 15 May, 2026 | 08:09 PM

Drone Subsidy: उत्तर प्रदेश में किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए सरकार ड्रोन तकनीक को तेजी से बढ़ावा दे रही है. अब किसान खेतों में दवा छिड़काव, फसल निगरानी और कई दूसरे कृषि कार्य ड्रोन की मदद से आसानी से कर सकते हैं. खास बात यह है कि सरकार किसानों को ड्रोन खरीदने पर भारी सब्सिडी भी दे रही है. ड्रोन तकनीक खेती का समय कम करने के साथ मजदूरी खर्च भी घटा रही है. यही वजह है कि अब छोटे किसान भी इस नई तकनीक की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. सरकार की इस योजना के तहत पात्र किसानों को ड्रोन खरीदने पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. इससे किसान कम खर्च में आधुनिक खेती की शुरुआत कर सकते हैं.

खेती में ड्रोन से कैसे मिलेगा फायदा

आज खेती में आधुनिक तकनीक  का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और ड्रोन इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है. पहले किसानों को खेतों में कीटनाशक और दवाओं का छिड़काव करने में घंटों मेहनत करनी पड़ती थी. कई बार मजदूर भी आसानी से नहीं मिलते थे. लेकिन अब ड्रोन की मदद से यह काम कुछ ही मिनटों में पूरा हो सकता है. ड्रोन से दवा का छिड़काव बराबर मात्रा में होता है, जिससे दवा की बचत भी होती है. साथ ही किसान जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क से भी बच जाते हैं. इसके अलावा किसान ड्रोन कैमरे की मदद से फसल की निगरानी कर सकते हैं. खेत के किस हिस्से में बीमारी फैल रही है या किस जगह पानी की कमी है, इसकी जानकारी आसानी से मिल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन तकनीक अपनाने से खेती की लागत घट सकती है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

किन किसानों को मिलेगा ज्यादा अनुदान

सरकार ने अलग-अलग वर्गों के किसानों के लिए सब्सिडी  की अलग व्यवस्था की है. छोटे और सीमांत किसान, महिला किसान और एससी-एसटी वर्ग के किसानों को ड्रोन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी. यह सहायता अधिकतम 5 लाख रुपये तक हो सकती है. वहीं सामान्य वर्ग के किसानों को 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा. इस श्रेणी में अधिकतम 4 लाख रुपये तक सहायता दी जा सकती है. इसके अलावा किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ, सहकारी समितियां और कस्टम हायरिंग सेंटर भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं. सरकार का उद्देश्य गांव स्तर पर ड्रोन सेवा उपलब्ध कराना है, ताकि छोटे किसान किराये पर भी ड्रोन का इस्तेमाल कर सकें.

ऑनलाइन आवेदन करके ऐसे उठाएं योजना का लाभ

ड्रोन सब्सिडी योजना का फायदा लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इसके लिए किसानों को कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट  पर जाकर पहले अपना पंजीकरण कराना होगा. इसके बाद यंत्र पर अनुदान सेक्शन में जाकर ड्रोन योजना का आवेदन फॉर्म भरना होगा. आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे. विभाग की तरफ से दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद पात्र किसानों को योजना का लाभ दिया जाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि आवेदन करते समय सभी जानकारी सही भरना जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो. सरकार की तरफ से सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी. इसलिए बैंक खाता आधार से लिंक होना जरूरी माना गया है.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और ट्रेनिंग

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे. इनमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, जमीन से जुड़ी खतौनी और सक्रिय मोबाइल नंबर जरूरी माना गया है. अगर किसान का बैंक खाता आधार से लिंक नहीं होगा, तो सब्सिडी मिलने में दिक्कत हो सकती है. इसलिए आवेदन से पहले यह काम पूरा करना जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ ड्रोन खरीदना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से चलाना भी जरूरी है. इसी वजह से सरकार किसानों को ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग भी दे रही है. इस ट्रेनिंग में किसानों को ड्रोन उड़ाने, दवा छिड़काव, रखरखाव और सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जाती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन तकनीक खेती  को और आसान बना सकती है. इससे किसानों का समय बचेगा, लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

Published: 16 May, 2026 | 06:00 AM

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