Tractor engine: खेती के काम में ट्रैक्टर किसान का सबसे बड़ा साथी होता है. लेकिन जब ट्रैक्टर खरीदने की बात आती है तो अक्सर दो शब्द बार-बार सुनने को मिलते हैं “सीसी” और “हॉर्स पावर (HP)”. कई बार किसान इन दोनों के बीच का फर्क ठीक से नहीं समझ पाते और जरूरत से कम या ज्यादा क्षमता वाला ट्रैक्टर खरीद लेते हैं. बाद में या तो ट्रैक्टर काम के हिसाब से कमजोर पड़ता है या फिर ईंधन और रखरखाव का खर्च बढ़ जाता है. इसलिए जरूरी है कि ट्रैक्टर लेने से पहले उसके इंजन की इन दोनों अहम बातों को समझ लिया जाए.
सीसी क्या होता है और क्यों जरूरी है?
सीसी का पूरा नाम क्यूबिक सेंटीमीटर होता है. इसे इंजन की “घन क्षमता” या “इंजन डिस्प्लेसमेंट” भी कहते हैं. आसान शब्दों में समझें तो सीसी बताता है कि इंजन के सिलेंडरों में कितनी मात्रा में हवा और ईंधन का मिश्रण भर सकता है.
इंजन के अंदर सिलेंडर होते हैं जिनमें पिस्टन ऊपर-नीचे चलता है. जब ईंधन और हवा का मिश्रण जलता है तो ऊर्जा पैदा होती है. जितनी ज्यादा जगह (सीसी) होगी, उतना ज्यादा मिश्रण जलेगा और उतनी ज्यादा ताकत पैदा होगी.
उदाहरण के लिए अगर किसी ट्रैक्टर का इंजन 2000 सीसी का है, तो इसका मतलब है कि उसके सभी सिलेंडरों की कुल क्षमता 2000 क्यूबिक सेंटीमीटर है. ज्यादा सीसी का मतलब बड़ा इंजन, जो आमतौर पर ज्यादा ताकत और ज्यादा टॉर्क दे सकता है. लेकिन इसके साथ ईंधन की खपत भी बढ़ सकती है.
भारत में ट्रैक्टरों की सामान्य सीसी रेंज
भारत में छोटे या मिनी ट्रैक्टर आमतौर पर 1000 से 1500 सीसी के बीच मिलते हैं. ये छोटे खेतों, बागवानी या हल्के कामों के लिए ठीक रहते हैं. मध्यम और बड़े ट्रैक्टर 2000 से 3000 सीसी तक के होते हैं. भारी खेती, गहरी जुताई और बड़े उपकरण चलाने के लिए ज्यादा सीसी वाला इंजन फायदेमंद होता है. कुछ खास मॉडल 3500 सीसी तक भी मिलते हैं, जो हैवी-ड्यूटी काम के लिए बनाए जाते हैं.
हॉर्स पावर (HP) क्या होता है?
हॉर्स पावर इंजन की ताकत मापने की इकाई है. इसे एचपी (HP) कहा जाता है. यह बताता है कि इंजन कितनी तेजी से और कितनी ताकत से काम कर सकता है. अगर किसी ट्रैक्टर की रेटिंग 50 एचपी है, तो इसका मतलब है कि वह इंजन 50 हॉर्स पावर की यांत्रिक शक्ति पैदा कर सकता है. ज्यादा एचपी वाला ट्रैक्टर भारी उपकरण खींच सकता है, गहरी जुताई कर सकता है और बड़े खेतों में तेजी से काम कर सकता है.
हॉर्स पावर सीधे इंजन से निकलने वाली उपयोगी ताकत को दर्शाता है. ट्रांसमिशन सिस्टम इस ताकत को पहियों और अन्य उपकरणों तक पहुंचाता है.
सीसी और हॉर्स पावर में क्या अंतर है?
सीसी और हॉर्स पावर दोनों इंजन से जुड़े हैं, लेकिन दोनों अलग चीजें बताते हैं. सीसी इंजन का आकार और उसकी आंतरिक क्षमता दिखाता है, जबकि हॉर्स पावर यह बताता है कि वह इंजन असल में कितनी ताकत पैदा कर रहा है.
आमतौर पर ज्यादा सीसी वाला इंजन ज्यादा हॉर्स पावर देता है, लेकिन यह हमेशा सीधा अनुपात नहीं होता. इंजन की डिजाइन, ट्यूनिंग, वाल्व सिस्टम और ईंधन तकनीक भी एचपी पर असर डालती है. सीसी इंजन की बनावट से जुड़ा आंकड़ा है, जबकि हॉर्स पावर काम करने की वास्तविक ताकत को दर्शाता है.
ट्रैक्टर खरीदते समय किसे ज्यादा महत्व दें?
अगर आप बड़े खेतों में खेती करते हैं, भारी हल, रोटावेटर या ट्रॉली खींचते हैं, तो आपको ज्यादा एचपी वाला ट्रैक्टर लेना चाहिए. ज्यादा हॉर्स पावर काम को तेजी और आसानी से पूरा करने में मदद करती है.
अगर आपका काम धीमी गति पर भारी वजन खींचने का है या आपको ज्यादा टॉर्क चाहिए, तो ज्यादा सीसी वाला इंजन फायदेमंद हो सकता है. बड़े इंजन कम गति पर भी अच्छा प्रदर्शन देते हैं.
छोटे खेत और हल्के काम के लिए कम एचपी और कम सीसी वाला ट्रैक्टर भी पर्याप्त होता है. ऐसे में ज्यादा बड़ा इंजन लेना सिर्फ अतिरिक्त खर्च बढ़ा सकता है.
ईंधन और रखरखाव का भी रखें ध्यान
ज्यादा सीसी और ज्यादा एचपी का मतलब आमतौर पर ज्यादा ईंधन खपत भी होता है. इसलिए ट्रैक्टर खरीदने से पहले यह सोचें कि आपको रोजाना किस तरह का काम करना है. जरूरत से ज्यादा ताकत वाला ट्रैक्टर लेने से लागत बढ़ सकती है. साथ ही बड़े इंजन का रखरखाव भी थोड़ा महंगा पड़ सकता है. इसलिए हमेशा अपनी खेती के आकार, काम की प्रकृति और बजट के हिसाब से फैसला लें.
समझदारी से करें चुनाव
ट्रैक्टर का इंजन उसकी जान होता है. सीसी और हॉर्स पावर दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सही चुनाव वही है जो आपके काम के मुताबिक हो. सिर्फ ज्यादा एचपी देखकर या ज्यादा सीसी सुनकर ट्रैक्टर न खरीदें. अगर आप इन दोनों की सही समझ के साथ ट्रैक्टर चुनेंगे, तो आपकी खेती भी मजबूत होगी और निवेश भी सही दिशा में जाएगा.