मक्का की नई हाईब्रिड किस्म ने किसानों को लुभाया, 88 दिन में 52 क्विंटल दे रही उपज

विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने मक्के की नई किस्म विकसित की है. यह किस्म कम दिनों में पककर तैयार हो जाती है और ज्यादा उत्पादन देती है.

Kisan India
Noida | Published: 6 Apr, 2025 | 03:10 PM

भारत के कृषि क्षेत्र में मक्के की खेती काफी अहम मानी जाती है. यह फसल उन लोगों के लिए बेहद खास जो इसकी खेती से व्यावसायिक तौर पर जुड़े हैं. इसी बीच अल्मोड़ा स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-Vivekananda Parvatiya Krishi Anusandhan Sansthan, Almora) के वैज्ञानिकों ने लंबी रिसर्च के बाद मक्के की नई हाईब्रिड किस्म (New Variety of Maize) को विकसित किया है. यह किस्म लाइसीन और ट्रिप्टोफैन जैसे अमीनो एसिड से भरपूर होने की वजह से खास है, जो इसकी पौष्टिकता को काफी बढ़ा देता है. जबकि, कम दिनों में ज्यादा उपज देने के लिए किसानों को बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

विवेक क्यूपीएम 9 की खासियत

मक्के की विवेक क्यूपीएम 9 किस्म (Vivek QPM 9 Hybrid) की खेती खरीफ मौसम में कर सकते हैं. यह मौसम इस वैरायटी की अच्छी ग्रोथ के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है. यह हाइब्रिड मक्का खासतौर से उन क्षेत्रों के लिए सही मानी जाती है, जहां उच्च नमी वाला मौसम होता है, जैसे जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, और कई दक्षिण और उत्तर-पूर्वी राज्य.

पोषक तत्वों से भरपूर है नई किस्म

विवेक क्यूपीएम 9 मक्का किस्म कई पोषक तत्त्वों से भरपूर होती है. साथ ही इसके दानों में लाइसीन 4.19 प्रतिशत प्रोटीन और ट्रिप्टोफैन 0.83 प्रतिशत होता हैं. जो अन्य हाइब्रिड मक्के की तुलना में अधिक होता है. यह दोनों अमीनो एसिड मक्का को विशेष रूप से पौष्टिक बनाते हैं, जो मानव और पशु आहार के लिए फायदेमंद होते हैं. ये गुण मक्का की इस किस्म को न केवल खाद्य सामग्री के रूप में, बल्कि पशुपालन के लिए भी उपयुक्त बनाते है.

88 दिनों में मिलेगी 52 क्विंटल उपज

मक्के की ये नई किस्म मात्र 88 दिनों में तैयार हो जाती है, जो किसानों के लिए अत्यधिक फायदेमंद साबित हो सकती हैं. इसके अलावा, इस किस्म का औसत उत्पादन लगभग 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है, जो कि मक्का की अन्य किस्मों के मुकाबले काफी बेहतर है. इसके ताजे दाने और उच्च गुणवत्ता वाली पैदावार किसानों को उच्च आय में मदद कर सकती है, जिससे उनका आर्थिक स्तर बेहतर हो सकता है.

सटीक खाद मात्रा से होगी बंपर पैदावार

मक्का की अच्छी ग्रोथ के लिए सही फर्टिलाइजर का इस्तेमाल बेहद जरूरी है. खाद की मात्रा मिट्टी की परिस्थितियों पर निर्भर करती है, इसलिए मिट्टी की सही जांच के बाद ही फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करें. मक्का के लिए प्रति हेक्टेयर 120 से 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 75 किलोग्राम फास्फोरस और 75 किलोग्राम पोटाश मिलाएं. वहीं बुवाई से पहले नाइट्रोजन का एक चौथाई हिस्सा मिलाने के साथ ही फास्फोरस और पोटाश की अच्छी मात्रा खेतों में मिलाएं. इसके साथ मिट्टी में कोई कमी रह जाए तो बुवाई से 15-20 दिन पहले जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है. बता दें कि 6-8 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर देने से नाइट्रोजन की जरूरत 25 प्रतिशत तक कम हो सकती है. बाकी बची हुई नाइट्रोजन को दो बार टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें सकते है.

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Published: 6 Apr, 2025 | 03:10 PM
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