खारे पानी से खराब होती मिट्टी और फसलों को बचाने वाला यंत्र बनाया, किसान दिलीप सिंह को मिला अवॉर्ड

पुरस्कार विजेता किसान दिलीप सिंह ने कहा कि यह बिल्कुल सिंपल यंत्र है. इसको इस्तेमाल करने में लाइट, सोलर, पेट्रोल, डीजल, ऑयल, किसी तरह का कोई यूज नहीं होता है. पाइप में लगे तांबे और चुंबकीय खिंचाव से यह यंत्र चलता है. इस यंत्र को किसान अपने एक खेत से दूसरे खेत में कभी भी उठाकर ले जा सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 3 Mar, 2026 | 04:57 PM

खेती में नए प्रयोग करने और नई तकनीक अपनाने वाले किसानों को सरकार प्रोत्साहित कर रही है. खारे पानी से खराब होती मिट्टी और फसल चौपट होती देख जोधपुर के किसान दिलीप सिंह ने ‘मैग्नेटिक वॉटर कंडीशनर’ यंत्र बनाया है और इसके लिए उन्हें बीते दिनों पूसा कृषि मेला में केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से ‘नवोन्मेषी किसान पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है. उनके यंत्र की मदद से पानी में मौजूद रासायनित तत्वों को चुंबकीय प्रभाव से तोड़कर पानी को फसलों के लिए इस्तेमाल करने योग्य और मिट्टी को नुकसान नहीं पहुंचाने वाला बनाता है.

आईसीएआर ने नवोन्मेषी किसान पुरस्कार दिया

राजस्थान की तपती रेतीली धरती और खारा पानी, जो कभी खेती के लिए अभिशाप माना जाता था, आज वहां एक किसान की वैज्ञानिक सोच ‘सोना’ उगा रही है. जोधपुर के प्रगतिशील किसान दिलीप सिंह गहलोत ने अपनी सूझबूझ से कृषि जगत में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है. जोधपुर के सफल किसान दिलीप सिंह गहलोत ने अपनी सूझबूझ से कृषि जगत में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है. उनकी इसी उपलब्धि के लिए उन्हें दिल्ली में प्रतिष्ठित ‘नवोन्मेषी किसान पुरस्कार’ से नवाजा गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) ने गहलोत को उनके अद्भुत ‘मैग्नेटिक वॉटर’ तकनीक के लिए सम्मानित किया है.

बीते दिनों में दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित कृषि मेला में पूर्व महानिदेशक डॉ. राजेंद्र सिंह परोदा और IARI के विशेषज्ञों ने किसान दिलीप सिंह गहलोत को यह सम्मान दिया है. अपनी खेती के साथ-साथ मछली पालन कर रहे दिलीप सिंह आज देश के किसानों के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं. उनका मैग्नेटिक वॉटर कंडीशनर यंत्र पानी के खारेपन को घटाकर मिट्टी और फसलों के लायक बनाता है.

चुंबक और तांबा के साथ स्टील के पाइप से बनाया मैग्नेटिक वॉटर कंडीशनर

किसान दिलीप सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 35 साल से वह खेती कर रहे हैं और उनके इलाके में पानी में खारापान ज्यादा होने से खेत की मिट्टी पर परत जम जाती है और इससे अंकुरण नहीं होता है. जबकि, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी घट जाती है. उन्होंने कहा कि कई सालों की लंबी रिसर्च के बाद एक ऐसा ‘मैग्नेटिक वॉटर कंडीशनर’ तैयार किया है, जो बिना किसी बिजली, बिना सोलर पैनल और बिना किसी ईंधन के चलता है. यह पूरी तरह से पोर्टेबल है और तांबे व स्टील की पाइप के भीतर लगे शक्तिशाली ‘नियोडिमियम चुंबक’ की मदद से काम करता है.

नवोन्मेषी पुरस्कार और मैग्नेटिक वॉटर कंडीशनर मॉडल के साथ किसान दिलीप सिंह.

यंत्र चलाने के लिए डीजल-पेट्रोल, बिजली या सोलर की जरूरत नहीं

किसान दिलीप सिंह ने कहा कि यह बिल्कुल सिंपल यंत्र है. इसको इस्तेमाल करने में लाइट, सोलर, पेट्रोल, डीजल, ऑयल, किसी तरह का कोई यूज नहीं होता है. पाइप में लगे तांबे और चुंबकीय खिंचाव से यह यंत्र चलता है. इस यंत्र को किसान अपने एक खेत से दूसरे खेत में कभी भी उठाकर ले जा सकते हैं. इस यंत्र का ये फायदा है कि इस पाइपनुमा यंत्र से खारे पानी को पास किया जाता है. इस दौरान पाइप में लगे ताबां र नियोडिमियम चुंबक की मदद से पानी में मौजूद क्षारीय कणों को तोड़ देता है और उसके बाद पानी को दूसरे सिरे से बाहर निकाल देता है. इससे पानी का खारापन कम हो जाता है और उसे खेत की मिट्टी और फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका कम हो जाती है.

मैग्नेटिक वॉटर कंडीशनर यंत्र की कितनी है कीमत

किसान ने कहा कि इस यंत्र की मदद से खारे पानी को ठीक किया जा सकता और इससे अलग-अलग फसलों का उत्पादन 30 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इस यंत्र के इस्तेमाल के बाद सिंचाई करने से पौधा स्वस्थ हो जाएगा और जमीन के ऊपर खारापन नहीं आएगा. उन्होंने कहा कि इस यंत्र को हम किसान 2 इंच और 3 इंच की चौड़ाई वाले पाइप के साथ बनकार 30 हजार से 50 हजार रुपये में मॉडल उपलब्ध करा देते हैं.

Published: 3 Mar, 2026 | 04:53 PM

Topics: