Bihar Animal Husbandry: गर्मी का मौसम शुरू होते ही पोल्ट्री फार्म चलाने वाले किसानों और ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ जाती है. तेज तापमान का सबसे ज्यादा असर मुर्गियों पर पड़ता है. अगर समय रहते सही प्रबंधन न किया जाए तो मुर्गियों में तनाव, बीमारी, अंडा उत्पादन में कमी और अचानक मौत जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, थोड़ी सी सावधानी और सही दवा प्रबंधन अपनाकर गर्मियों में भी मुर्गियों को स्वस्थ रखा जा सकता है. खासकर विटामिन C, साफ पानी, टीकाकरण और बाहरी परजीवियों से बचाव पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. यही आसान उपाय किसानों को नुकसान से बचाकर बेहतर मुनाफा दिला सकते हैं.
गर्मी में मुर्गियों को सबसे ज्यादा क्या परेशानी होती है
गर्म मौसम में मुर्गियां जल्दी तनाव में आ जाती हैं. तापमान बढ़ने पर वे कम दाना खाती हैं, ज्यादा पानी पीती हैं और हांफने लगती हैं. इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है. विभाग के अनुसार इस मौसम में अंडा देने वाली मुर्गियों का उत्पादन भी घट सकता है. ब्रॉयलर मुर्गियों में वजन बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ जाती है. अगर शेड में हवा का सही इंतजाम न हो तो स्थिति और खराब हो सकती है. इसलिए सुबह और शाम के समय पर्याप्त वेंटिलेशन, ठंडा पानी और भीड़ कम रखना जरूरी है. फर्श को सूखा रखना और धूप की सीधी मार से बचाना भी उतना ही जरूरी है.
विटामिन C देगा गर्मी के तनाव से राहत
विभाग का सबसे अहम औषधीय सुझाव है कि गर्मियों में विटामिन C जरूर दिया जाए. यह तनाव कम करने, रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाने और ग्रोथ को सपोर्ट करने में मदद करता है. प्रति 100 मुर्गियों के लिए 5 से 10 ग्राम विटामिन C पाउडर पानी में मिलाकर देना फायदेमंद माना गया है. इससे मुर्गियां गर्मी को बेहतर तरीके से सहन कर पाती हैं. पानी हमेशा साफ और ताजा होना चाहिए, क्योंकि गर्मी में दूषित पानी बीमारी का बड़ा कारण बन सकता है. कई किसान दिन में दो बार पानी बदलकर बेहतर परिणाम पा रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो गर्मी में मुर्गियों के लिए विटामिन C किसी तनाव ढाल की तरह काम करता है.
नीम और साफ-सफाई से परजीवियों पर रोक
गर्मी में बाहरी परजीवी जैसे जूं, माइट्स और दूसरे कीट तेजी से बढ़ते हैं. ये मुर्गियों की त्वचा और पंखों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कमजोरी और बीमारी बढ़ती है. विभाग के अनुसार इससे बचाव के लिए नीम के पत्तों का अर्क छिड़कना या थोड़ी मात्रा में पानी के साथ उपयोग करना लाभदायक है. नीम प्राकृतिक तरीके से कीट नियंत्रण में मदद करता है. इसके साथ शेड की नियमित सफाई, सूखा बिछावन और गीली जगहों को तुरंत हटाना जरूरी है. जहां गंदगी होगी, वहां संक्रमण तेजी से बढ़ेगा. इसलिए साफ-सफाई को दवा जितना ही जरूरी माना गया है.
टीकाकरण और समय पर दवा से होगा पूरा बचाव
गर्मी शुरू होने से पहले ही रानीखेत और अन्य जरूरी टीके लगवाना बेहद जरूरी है. विभाग के अनुसार टीकाकरण से बीमारी फैलने का खतरा काफी कम हो जाता है. छोटे पोल्ट्री पालकों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बिना टीके के गर्मियों में जोखिम बढ़ जाता है. समय पर वैक्सीनेशन, विटामिन C, नीम का उपयोग और साफ पानी-ये चार आसान कदम मुर्गियों को सुरक्षित रखते हैं. अगर मुर्गियां स्वस्थ रहेंगी तो अंडा उत्पादन और वजन दोनों बेहतर रहेगा. यही वजह है कि विभाग किसानों को सलाह दे रहा है कि गर्मियों में लापरवाही बिल्कुल न करें और छोटे-छोटे उपायों से बड़े नुकसान से बचें.