अब प्याज की बुवाई और कटाई में नहीं लगेगा ज्यादा पैसा, ये मशीन बन रही किसानों की असली ताकत

पहले प्याज की रोपाई और कटाई पूरी तरह मजदूरों पर निर्भर रहती थी. एक एकड़ खेत में प्याज की रोपाई के लिए 20 से 25 मजदूरों की जरूरत पड़ती थी. इसमें समय भी ज्यादा लगता था और खर्च भी. कई बार रोपाई में देरी हो जाती थी, जिससे फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ता था.

नई दिल्ली | Published: 29 Jan, 2026 | 03:13 PM

Onion farming machine: देश के कई राज्यों में प्याज किसानों की आजीविका का बड़ा सहारा है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में हजारों किसान साल भर प्याज की खेती करते हैं. वजह साफ है प्याज की मांग कभी खत्म नहीं होती. चाहे त्योहार हों या आम दिन, हर रसोई में प्याज जरूरी है. लेकिन पिछले कुछ सालों में किसानों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हुई है, और वह है खेती की बढ़ती लागत. मजदूरी महंगी होती जा रही है और समय पर मजदूर मिलना भी मुश्किल हो गया है. ऐसे में प्याज की खेती में मशीनों का इस्तेमाल किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रहा है.

मजदूरों की कमी का हल बन रही है आधुनिक मशीन

पहले प्याज की रोपाई और कटाई पूरी तरह मजदूरों पर निर्भर रहती थी. एक एकड़ खेत में प्याज की रोपाई के लिए 20 से 25 मजदूरों की जरूरत पड़ती थी. इसमें समय भी ज्यादा लगता था और खर्च भी. कई बार रोपाई में देरी हो जाती थी, जिससे फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ता था. अब जैसे-जैसे किसान मशीनों की ओर बढ़ रहे हैं, यह परेशानी काफी हद तक कम हो गई है. प्याज रोपने की मशीन यानी अनियन ट्रांसप्लांटर ने खेती का तरीका ही बदल दिया है.

मशीन से रोपाई करने पर कैसे घटता है खर्च

जब किसान मशीन से प्याज की रोपाई करते हैं तो एक एकड़ खेत में सिर्फ 5 से 6 मजदूरों की जरूरत पड़ती है. ट्रैक्टर के साथ चलने वाली मशीन खुद पौधों को सही दूरी और गहराई पर लगा देती है. जहां पहले एक एकड़ में मजदूरी पर 18 से 20 हजार रुपये तक खर्च हो जाते थे, वहीं मशीन के इस्तेमाल से यह खर्च घटकर करीब 10 से 12 हजार रुपये रह जाता है. यानी सीधे-सीधे आधे से ज्यादा की बचत. यही नहीं, काम तेजी से पूरा होने के कारण समय भी बचता है और किसान अगली खेती की तैयारी जल्दी कर पाता है.

बेहतर रोपाई से बढ़ती है फसल की गुणवत्ता

मशीन से रोपाई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पौधे एक सी लाइन में और बराबर दूरी पर लगते हैं. हर पौधा समान गहराई में रोपा जाता है, जिससे जड़ों का विकास अच्छा होता है. इसका सीधा असर प्याज के आकार और वजन पर पड़ता है. खेत में सभी पौधे एक जैसे बढ़ते हैं, जिससे फसल देखने में भी एकसमान होती है. बाजार में ऐसी प्याज की मांग ज्यादा होती है और किसान को बेहतर दाम मिलते हैं.

सिंचाई और देखभाल भी हो जाती है आसान

जब रोपाई सीधी और बराबर दूरी पर होती है तो सिंचाई में भी काफी आसानी होती है. ड्रिप सिंचाई सिस्टम के साथ मशीन से की गई रोपाई बहुत अच्छे नतीजे देती है. पानी हर पौधे तक सही मात्रा में पहुंचता है और पानी की बर्बादी भी कम होती है. निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण का काम भी आसान हो जाता है, क्योंकि खेत में लाइनें साफ दिखाई देती हैं.

उत्पादन बढ़ने से मुनाफा भी बढ़ता है

अगर किसान अच्छी किस्म के बीज का चयन करें और मशीन से रोपाई के साथ आधुनिक तकनीक अपनाएं, तो प्रति एकड़ 15 टन या उससे ज्यादा प्याज का उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है. लागत कम होने और पैदावार ज्यादा होने का सीधा फायदा किसान की जेब पर पड़ता है. यही वजह है कि अब छोटे और मध्यम किसान भी धीरे-धीरे मशीनों की ओर रुख कर रहे हैं.

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