शहद उत्पादन में तीसरे स्थान पर पहुंचा पंजाब, सरकार की इन नीतियों से हुआ संभव.. किसानों की बढ़ी कमाई
पंजाब शहद उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. कृषि विविधीकरण, PAU के शोध और मधुमक्खी पालन से राज्य में ग्रामीण आय, रोजगार और कृषि उत्पादकता को नई मजबूती मिली है. यह उपलब्धि राज्य की कृषि नवाचार और विविधीकरण की रणनीति को दर्शाती है.
Honey Production: पंजाब केवल धान और गेहूं का ही नहीं बंपर उत्पादन होता है, बल्कि शहद के मामले में भी राज्य ने कमाल कर दिया है. पंजाब शहद उत्पादन में भारत में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा कृषि विविधीकरण और सहायक व्यवसायों पर दिए जा रहे जोर का असर अब साफ दिखने लगा है, जिसमें मधुमक्खी पालन एक अहम विकल्प बनकर उभरा है.
मधुमक्खी पालन सिर्फ शहद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मोम, रॉयल जेली, प्रोपोलिस और बी-पॉलन जैसे उत्पाद भी मिलते हैं, जिनकी बाजार और पोषण दोनों के लिहाज से अच्छी मांग है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, पंजाब में सालाना 21,100 टन शहद का उत्पादन होता है, जो देश के कुल 1.5 लाख टन उत्पादन का 14.07 प्रतिशत है. यह उपलब्धि राज्य की कृषि नवाचार और विविधीकरण की रणनीति को दर्शाती है.
देश के शहद उद्योग को बड़ा बढ़ावा मिला
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना मधुमक्खी पालन के विकास में भी अग्रणी रहा है. 1960 के दशक में PAU ने अधिक शहद देने वाली प्रजाति एपिस मेलिफेरा (Apis mellifera) को पंजाब में पेश किया. व्यापक शोध के बाद इसे 1976 में किसानों में वितरित किया गया, जिसे बाद में देशभर में अपनाया गया और इससे देश के शहद उद्योग को बड़ा बढ़ावा मिला.
निर्माण, पैकेजिंग और परिवहन को बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार, आज मधुमक्खी पालन सिर्फ शहद उत्पादन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह किसानों, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता का मजबूत जरिया बन चुका है. इसके साथ ही उपकरण निर्माण, पैकेजिंग और परिवहन जैसी सहायक गतिविधियों से भी अतिरिक्त आर्थिक अवसर पैदा हुए हैं. PAU के प्रधान कीट वैज्ञानिक डॉ. जसपाल सिंह ने कहा कि मधुमक्खी पालन केवल शहद नहीं है, यह अवसरों का एक पूरा इकोसिस्टम है. विश्वविद्यालय ने रानी मधुमक्खी पालन, बी-वेनम संग्रह, रॉयल जेली उत्पादन, पराग विकल्प और रोग प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों को मानकीकृत किया है. कॉलोनी की सेहत पर जोर देते हुए PAU पंजाब और आसपास के राज्यों के मधुमक्खी पालकों को गुणवत्तापूर्ण रानी मधुमक्खियां भी उपलब्ध कराता है.
मधुमक्खी पालकों को आधुनिक तकनीकों से मदद
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कीट विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. मनमीत बराड़ भुल्लर ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य फोकस स्वस्थ मधुमक्खी कॉलोनियों को बनाए रखना और मधुमक्खी पालकों को आधुनिक तकनीकों से सशक्त करना है. PAU एक तीन-स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत शुरुआती किसानों के लिए बेसिक ट्रेनिंग, प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों के लिए एडवांस कोर्स और कृषि विस्तार कर्मियों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित करता है. इसके अलावा, मासिक वर्कशॉप्स के जरिए किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जाती है. शहद को केवल पोषण के लिए ही नहीं, बल्कि फसल परागण में इसकी अहम भूमिका के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जिससे कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है.