गेहूं की स्टॉक लिमिट पर सरकार का बड़ा फैसला, अब दुकानदार 8 टन से ज्यादा नहीं कर पाएंगे स्टोर
केंद्र सरकार ने गेहूं की जमाखोरी रोकने के लिए सख्त स्टॉक सीमा लागू की है. व्यापारी, रिटेलर और प्रोसेसर तय मात्रा से ज्यादा गेहूं नहीं रख सकेंगे. सभी इकाइयों को स्टॉक विवरण सरकारी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा. नियम 31 मार्च तक लागू रहेंगे.
Wheat Stock Limit: केंद्र सरकार ने देशभर में गेहूं के भंडारण को नियंत्रित करने के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं. जमाखोरी रोकने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से ये नए स्टॉक सीमा नियम 31 मार्च तक लागू रहेंगे. यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी किया गया है. आदेश के मुताबिक, व्यापारी और थोक विक्रेता अधिकतम 2,000 मीट्रिक टन गेहूं ही रख सकेंगे. वहीं, पारंपरिक खुदरा दुकानदारों के लिए सीमा और सख्त है. हर दुकान पर सिर्फ 8 मीट्रिक टन गेहूं रखने की अनुमति होगी.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े संगठित रिटेल चेन को थोड़ी राहत दी गई है, लेकिन नियंत्रण बना रहेगा. वे हर आउटलेट पर 8 मीट्रिक टन गेहूं रख सकते हैं, हालांकि उनके सभी आउटलेट और वितरण केंद्रों में कुल स्टॉक, आउटलेट की संख्या × 8 मीट्रिक टन से ज्यादा नहीं हो सकता. ये नई सीमाएं पहले की तुलना में काफी कम हैं और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में समान रूप से लागू होंगी. मई 2025 के बाद यह गेहूं भंडारण नियमों में पहला बड़ा बदलाव है, जो बाजार की स्थिति को लेकर सरकार की बढ़ती चिंता को दर्शाता है.
औद्योगिक प्रोसेसरों पर भी सख्त नियम लगाए गए
गेहूं से आटा, ब्रेड, बिस्कुट जैसे उत्पाद बनाने वाले औद्योगिक प्रोसेसरों पर भी सख्त नियम लगाए गए हैं. वे अब अपनी मासिक स्थापित क्षमता के 60 प्रतिशत तक ही गेहूं रख सकेंगे, वह भी अप्रैल 2026 तक बचे महीनों के हिसाब से. उदाहरण के तौर पर, यदि किसी प्रोसेसर की क्षमता 1,000 मीट्रिक टन प्रति माह है और चार महीने बाकी हैं, तो वह सिर्फ 600 मीट्रिक टन गेहूं ही स्टॉक कर सकेगा.
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पूरे देश में गेहूं भंडारण की निगरानी
अधिसूचना के अनुसार, यह नया फार्मूला इस तरह तैयार किया गया है कि प्रोसेसरों को उत्पादन जारी रखने के लिए जरूरी बफर स्टॉक मिल सके, लेकिन जरूरत से ज्यादा भंडारण न हो. आदेश की एक अहम बात यह है कि सभी संबंधित इकाइयों को अपने मौजूदा गेहूं स्टॉक की जानकारी खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सरकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी. यही पोर्टल पूरे देश में गेहूं भंडारण की निगरानी का मुख्य माध्यम होगा.
15 दिनों के भीतर स्टॉक घटाकर तय सीमा तक लाना होगा
आदेश में साफ कहा गया है कि यदि कोई इकाई तय सीमा से ज्यादा स्टॉक रखती पाई जाती है, तो उसे 15 दिनों के भीतर स्टॉक घटाकर तय सीमा तक लाना होगा. यह कदम डिजिटल और रियल-टाइम निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी संकेत देता है. नियमित रिपोर्टिंग के जरिए स्टॉक की गलत जानकारी देने और हेराफेरी पर रोक लगाने का लक्ष्य रखा गया है.