IMD के बाद अब PM मोदी ने भी किसानों को दिए सुझाव, अल नीनो को लेकर नीति आयोग की बैठक में हुई चर्चा!

नीति आयोग की अहम बैठक में मौसम, खेती और जल संसाधनों से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों को सतर्क रहने और भविष्य की परिस्थितियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया. बैठक में जल संरक्षण, टिकाऊ खेती और बदलते मौसम के असर से निपटने की रणनीतियों पर भी जोर दिया गया.

नोएडा | Updated On: 12 Jun, 2026 | 04:13 PM

NITI Aayog Meeting: देश में मानसून की स्थिति और खेती पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में अल नीनो प्रमुख चर्चा का विषय रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में करीब 8 घंटे तक विभिन्न मुद्दों पर मंथन हुआ, लेकिन अल नीनो (El Nino Alert) के कारण मानसून पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव और उससे निपटने की तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया. प्रधानमंत्री ने राज्यों से जल संरक्षण बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया.

अल नीनो को लेकर राज्यों को सतर्क रहने की सलाह

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अल नीनो  की स्थिति से पैदा होने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि मौसम में होने वाले बदलाव कृषि और जल संसाधनों पर असर डाल सकते हैं. ऐसे में राज्यों को अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण योजनाओं को तेज करने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और किसानों को पानी के बेहतर उपयोग के लिए जागरूक करने पर जोर दिया. उनका कहना था कि समय रहते तैयारी करने से संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

मानसून और खेती पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो की स्थिति बनने पर कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना रहती है. इसका सीधा असर खरीफ फसलों  और जल भंडारण पर पड़ सकता है. यही कारण है कि नीति आयोग की बैठक में मानसून से जुड़े जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में राज्यों से कहा गया कि वे कृषि विभागों और मौसम एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाएं. इससे किसान बदलते मौसम के अनुसार अपनी रणनीति तैयार कर सकेंगे.

प्राकृतिक और जैविक खेती पर बढ़ा जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच प्राकृतिक और जैविक खेती  का महत्व बढ़ता जा रहा है. उन्होंने बताया कि चालू खरीफ सीजन में किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि की दिशा में बढ़ते भरोसे को दर्शाती है. सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और कम पानी में भी खेती को टिकाऊ बनाया जा सकता है. यही वजह है कि राज्यों को इस दिशा में अधिक प्रयास करने की सलाह दी गई.

वैश्विक चुनौतियों के बीच तैयारियों पर फोकस

बैठक में मध्यपूर्व एशिया संकट, ऊर्जा सुरक्षा  और देश की विकास गति बनाए रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई. प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है. हालांकि बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश अल नीनो और जल प्रबंधन को लेकर रहा. सरकार चाहती है कि राज्य समय रहते तैयारी करें, ताकि मानसून में किसी भी तरह की चुनौती आने पर किसानों और कृषि क्षेत्र पर उसका असर कम से कम पड़े.

Published: 12 Jun, 2026 | 01:50 PM

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