आने वाले दिनों में धीमी पड़ सकती है मॉनसून की रफ्तार, खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ेगा असर

Southwest Monsoon 2026: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल और माहे में सक्रिय हो चुका है, लेकिन आगे इसकी रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत मिल रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार मुंबई में मॉनसून करीब 12 दिन की देरी से पहुंच सकता है. अल-नीनो के बढ़ते प्रभाव और अरब सागर-बंगाल की खाड़ी में मजबूत मौसमीय सिस्टम की कमी के कारण कई राज्यों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 5 Jun, 2026 | 04:21 PM

Monsoon 2026: देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने केरल में जोरदार दस्तक दे दी है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों को राहत मिली है. लेकिन अब मौसम से जुड़ी एक नई रिपोर्ट लोगों की चिंता बढ़ा रही है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि, आने वाले दिनों में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और इसका असर कई राज्यों में बारिश पर देखने को मिल सकता है. पश्चिमी तट पर मॉनसून की रफ्तार अब पहले जैसी तेज नहीं रहेगी. इसका असर खेती-किसानी और खरीफ फसलों की बुवाई पर भी पड़ सकता है.

मुंबई में मॉनसून पहुंचने में हो सकती है देरी

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मॉनसून सामान्य समय से करीब 12 दिन की देरी से पहुंच सकता है. बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि यहां 22 जून के आसपास मॉनसूनी बारिश शुरू हो सकती है. इसके बाद भी जून के आखिरी सप्ताह में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है. मॉनसून की धीमी रफ्तार का असर महाराष्ट्र, गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है.

अल-नीनो क्यों बना हुआ है चिंता का कारण?

इस बीच अल-नीनो का असर भी धीरे-धीरे बढ़ने लगा है. अल-नीनो एक मौसम संबंधी स्थिति है, जो प्रशांत महासागर के पानी के तापमान में बदलाव के कारण बनती है और इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है. अल-नीनो के प्रभाव से बारिश के लिए जरूरी परिस्थितियां कमजोर पड़ने लगती हैं. इससे बादल कम बनते हैं और बारिश कराने वाले सिस्टम भी आसानी से विकसित नहीं हो पाते. यही कारण है कि अल-नीनो की वजह से कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है, जिसका असर खेती-किसानी और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है.

IMD ने भी जताई चिंता

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मौसम मॉडल भी फिलहाल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में किसी मजबूत कम दबाव वाले क्षेत्र के संकेत नहीं दे रहे हैं. आमतौर पर ऐसे सिस्टम मॉनसून को आगे बढ़ाने और देश के अंदरूनी हिस्सों तक नमी पहुंचाने का काम करते हैं. लेकिन इस समय ऐसे मजबूत मौसमीय सिस्टम की कमी दिखाई दे रही है. यही कारण है कि मॉनसून की रफतार कुछ समय के लिए धीमी पड़ सकती है.

कई राज्यों में कमजोर पड़ सकती है बारिश

रिपोर्ट के अनुसार, 10 से 16 जून के बीच मध्य भारत, दक्षिण गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बारिश काफी कम रह सकती है. कई क्षेत्रों में लगभग सूखे जैसे हालात भी बन सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जून के बाकी दिनों में भी कोई बड़ा मौसमीय सिस्टम सक्रिय होता नहीं दिख रहा है, जिससे बारिश में तेजी आने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है.

गुजरात और राजस्थान के कई इलाकों में मॉनसून की एंट्री में देरी हो सकती है. वहीं उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य या सामान्य से कम रह सकती है. हालांकि मौसम लगातार बदलता रहता है और नए सिस्टम बनने पर स्थिति में बदलाव भी संभव है.

किसानों को क्या करना चाहिए?

खरीफ सीजन की बुवाई शुरू हो चुकी है. ऐसे में किसान मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर लगातार नजर रखें. पर्याप्त नमी वाले क्षेत्रों में ही बुवाई करें और जल्दबाजी से बचें. अगर अल-नीनो का असर बढ़ता है तो जल संरक्षण, कम पानी वाली फसलों और मौसम के अनुसार खेती की योजना पर ध्यान देना किसानों के लिए फायदेमंद रहेगा. समय पर सही फैसला लेने से संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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