अल नीनो से बढ़ सकती हैं दुनिया में चीनी की कीमतें, गन्ना समेत इन फसलों की पैदावार पर भी खतरा
अगर अल नीनो मजबूत होता है तो इसका असर भारत सहित कई देशों के मौसम पर भी पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशिया में गर्मी बढ़ने और कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बनने की आशंका रहती है. इससे गन्ना, गेहूं और अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है.
El Nino sugar prices: दुनिया भर में मौसम के बदलते पैटर्न और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब कृषि बाजार पर भी दिखाई देने लगा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में अल नीनो (El Niño) की स्थिति मजबूत होती है तो इसका सीधा असर कई कृषि फसलों के उत्पादन पर पड़ सकता है. खासतौर पर चीनी, पाम ऑयल, गेहूं और कॉफी जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक बाजार में इनके दाम तेजी से बढ़ सकते हैं.
बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, अमेरिका के विश्लेषक माइकल फेरारी का कहना है कि अल नीनो का प्रभाव इस बार केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक कमोडिटी बाजार में भी बड़ा बदलाव ला सकता है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण पहले से ही कई वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. ऐसे में अगर मौसम भी प्रतिकूल हुआ तो कृषि उत्पादन में गिरावट आ सकती है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है.
चीनी बन सकती है रणनीतिक वस्तु
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में चीनी केवल खाद्य पदार्थ ही नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण रणनीतिक वस्तु भी बन सकती है. इसका कारण यह है कि गन्ने से बनने वाला एथेनॉल ऊर्जा क्षेत्र में भी इस्तेमाल होता है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ती हैं, तो एथेनॉल की मांग भी बढ़ जाती है.
ऐसी स्थिति में चीनी और गन्ने की अहमियत और बढ़ जाती है. अगर गन्ने का उत्पादन कम होता है या सप्लाई सीमित हो जाती है तो चीनी के साथ-साथ एथेनॉल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. यही वजह है कि विशेषज्ञ इस साल और अगले साल चीनी को एक महत्वपूर्ण वैश्विक कमोडिटी मान रहे हैं.
अल नीनो से फसलों पर पड़ सकता है दबाव
अल नीनो एक ऐसा मौसमीय चक्र है जिसमें प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इससे दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का पैटर्न बदल जाता है. कहीं अत्यधिक गर्मी पड़ती है तो कहीं सूखा और कहीं भारी बारिश की स्थिति बन जाती है. ऐसे बदलावों का सीधा असर खेती पर पड़ता है. अधिक गर्मी और सूखे की स्थिति में फसलों पर तनाव बढ़ जाता है, जिससे पैदावार घट सकती है. अगर उत्पादन कम हुआ तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ना लगभग तय माना जाता है.
2026-27 में मजबूत अल नीनो की आशंका
मौसम से जुड़ी कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने 2026-27 में मजबूत अल नीनो बनने की संभावना जताई है. यूरोपीय मौसम एजेंसी ECMWF के अनुसार इस साल मजबूत अल नीनो बनने की करीब 80 प्रतिशत संभावना है. अमेरिका और जापान की कई एजेंसियां भी इसी तरह का अनुमान लगा रही हैं. हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि यह सुपर अल नीनो बनेगा या नहीं, लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्र के भीतर तापमान में तेजी से बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं. इससे आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.
भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है असर
अगर अल नीनो मजबूत होता है तो इसका असर भारत सहित कई देशों के मौसम पर भी पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशिया में गर्मी बढ़ने और कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बनने की आशंका रहती है. इससे गन्ना, गेहूं और अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. दूसरी ओर ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देशों में ज्यादा गर्म और नम मौसम देखने को मिल सकता है, जिससे वहां की कृषि व्यवस्था पर अलग तरह का असर पड़ेगा.
किसानों और बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक कृषि बाजार पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा. अगर अल नीनो के कारण फसलों की पैदावार घटती है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो चीनी जैसी फसलों की मांग और कीमत दोनों बढ़ सकती हैं.
इस स्थिति में किसानों के लिए जहां बेहतर कीमत मिलने की संभावना होगी, वहीं खाद्य उद्योग और उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है. इसलिए आने वाला समय कृषि बाजार के लिए काफी अहम माना जा रहा है.