महज 35 दिनों में चीनी उत्पादन का अनुमान घटाया गया, अब 283 लाख टन प्रोडक्शन की है उम्मीद

एसोसिएशन की फसल समिति के अनुसार, इस सीजन में महाराष्ट्र और कर्नाटक में असामान्य मौसम का असर गन्ने की फसल  पर पड़ा. लगातार बारिश और लंबे समय तक बादल छाए रहने से गन्ने की वृद्धि और पकने की प्रक्रिया प्रभावित हुई. खासकर अक्टूबर में ज्यादा बारिश से महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में जलभराव हुआ, जिससे खेतों में काम प्रभावित हुआ.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 6 Mar, 2026 | 05:51 PM

Sugar Production: ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन ने 2025-26 सीजन (अक्टूबर–सितंबर) के लिए भारत में चीनी उत्पादन का अपना अनुमान घटाकर 283 लाख टन कर दिया है. यह कमी प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में गन्ने की कम पैदावार को देखते हुए की गई है. खास बात यह है कि महज 35 दिनों में यह अनुमान कम किया गया है, जबकि पहले वैश्विक बाजार में भारत से बंपर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही थी.

द बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारत के निर्यात को लेकर स्थिति साफ हो रही है. वहीं ब्राजील में कच्चे तेल को लेकर अनिश्चितता के कारण गन्ने का ज्यादा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन  में जा सकता है. ऐसे में आने वाले समय में वैश्विक चीनी कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) का कहना है कि 28 जनवरी को जारी अपने पहले अनुमान में 2025-26 सीजन के लिए नेट चीनी उत्पादन 296 लाख टन बताया गया था, जो 2024-25 के 262 लाख टन से अधिक था. वहीं कुल चीनी उत्पादन 315 लाख टन रहने का अनुमान है, जिसमें से लगभग 32 लाख टन गन्ना एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

कर्नाटक में असामान्य मौसम का असर गन्ने की फसल पर पड़ा

एसोसिएशन की फसल समिति के अनुसार, इस सीजन में महाराष्ट्र और कर्नाटक में असामान्य मौसम का असर गन्ने की फसल  पर पड़ा. लगातार बारिश और लंबे समय तक बादल छाए रहने से गन्ने की वृद्धि और पकने की प्रक्रिया प्रभावित हुई. खासकर अक्टूबर में ज्यादा बारिश से महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में जलभराव हुआ, जिससे खेतों में काम प्रभावित हुआ और फसल पर दबाव पड़ा. इसके अलावा जल्दी फूल आने से पेड़ी फसलों की पैदावार भी कई जगह कम हो गई.

यूपी में 91 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद

ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के अनुसार महाराष्ट्र, जो देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है, वहां 2025-26 में करीब 99.7 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है. पहले यह अनुमान 108.1 लाख टन था, हालांकि यह पिछले साल के 81 लाख टन से अधिक है. उत्तर प्रदेश, जो दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, वहां उत्पादन का अनुमान घटाकर 91 लाख टन कर दिया गया है, जो पहले 94.1 लाख टन था और पिछले साल के 93 लाख टन से भी कम है. AISTA के मुताबिक, गुड़ बनाने वाली इकाइयों में गन्ने की ज्यादा मांग होने से चीनी मिलों को गन्ना कम मिला. वहीं कर्नाटक में उत्पादन का अनुमान 48 लाख टन लगाया गया है, जो पहले 49.1 लाख टन था, लेकिन यह पिछले साल के 43 लाख टन से अधिक है.

उत्तर प्रदेश में चीनी की रिकवरी दर लगभग 0.5 प्रतिशत बढ़ी

महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा देते हैं. उद्योग संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने भी 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 292.9 लाख टन कर दिया है. AISTA ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चीनी की रिकवरी दर लगभग 0.5 प्रतिशत बढ़ी है, लेकिन गन्ने की पैदावार अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है.

उत्तर प्रदेश में गन्ने की इन किस्मों की होती है खेती

बता दें कि उत्तर प्रदेश देश में पेराई सत्र 2024-25 में राज्य की 122 चीनी मिलें चालू हैं. प्रदेश में लगभग 29.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती  होती है. राज्य सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (SAP) बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेगा. ऐसे उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. यहां Co.Sha 19231, Co.Sha 13235 और Co.Sha 18231 जैसी नई किस्में ज्यादा उगाई जा रही हैं. ये किस्में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के प्रति प्रतिरोधी हैं और लगभग 1000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने के साथ अच्छी चीनी रिकवरी भी देती हैं. इसके अलावा Co.Lk 14201 और Co.15023 भी प्रदेश की प्रमुख गन्ना किस्मों में शामिल हैं.

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Published: 6 Mar, 2026 | 05:50 PM

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