हिमाचल में सेब किसानों की बढ़ी चिंता, बर्फबारी की कमी से सेब उत्पादन होगा प्रभावित

कुल्लू-मनाली में लंबे सूखे और बर्फबारी न होने से पर्यटन और सेब उत्पादन प्रभावित हो रहे हैं. मनाली में पर्यटक कम आए हैं, लाहौल घाटी की ओर रुख बढ़ा है. सेब उत्पादक भी चिंतित हैं. मौसम विभाग 16-21 जनवरी के बीच बर्फबारी का अनुमान दे रहा है, जिससे थोड़ी उम्मीद बनी है.

नोएडा | Updated On: 23 Jan, 2026 | 08:30 PM

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली क्षेत्र में लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने से पर्यटन कारोबार और सेब उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है. जनवरी का आधा महीना बीतने के बावजूद बर्फ न गिरना न सिर्फ पर्यटकों को निराश कर रहा है, बल्कि खेती और बागवानी के लिए भी खतरे की घंटी है. बर्फबारी यहां पर्यटन का मुख्य आकर्षण होने के साथ-साथ कृषि के लिए भी बेहद जरूरी मानी जाती है.

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल मनाली में इस सर्दी पर्यटकों की संख्या में साफ गिरावट देखने को मिल रही है. आमतौर पर सर्दियों में बर्फबारी  और उससे जुड़ी एडवेंचर गतिविधियां बड़ी संख्या में सैलानियों को आकर्षित करती हैं, लेकिन इस बार बर्फ न होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है. मनाली होटलियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रोशन ठाकुर ने कहा कि बर्फ न होने से पर्यटक असंतुष्ट हैं और कई लोग लाहौल घाटी के कोकसर और शिंकुला पास की ओर रुख कर रहे हैं, जहां थोड़ी बहुत बर्फ है.  हालांकि सुरक्षा कारणों से जिला प्रशासन ने रोहतांग पास को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है.

पर्यटन उद्योग इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है

वहीं, मनाली होटलियर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनुप ठाकुर ने भी हालात पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सर्दियों में लोग खास तौर पर बर्फबारी का अनुभव लेने मनाली आते हैं, लेकिन लंबे सूखे मौसम के कारण अब तक बर्फ नहीं गिरी है और सभी को इसका बेसब्री से इंतजार है. पर्यटन से जुड़े कारोबारी हेम राज शर्मा ने भी जनवरी का आधा महीना बीत जाने के बावजूद बर्फबारी न होने पर निराशा जताई. उन्होंने कहा कि सर्दियों की बर्फ पर निर्भर रहने वाला पर्यटन उद्योग इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.

कुछ हिस्सों में बर्फबारी का अनुमान जताया

सूखे मौसम का असर सेब उत्पादकों पर भी साफ दिख रहा है. सेब के बागानों के लिए समय पर बर्फबारी बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इससे पेड़ों को जरूरी चिलिंग ऑवर पूरे होते हैं, जो फूल और फल  बनने के लिए अहम हैं. बर्फ को ‘सफेद खाद’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह मिट्टी में नमी बनाए रखती है और पेड़ों को पोषण देती है. मनाली के सेब उत्पादक मनु शर्मा ने कहा कि बर्फ न गिरने से इस साल सेब उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है. लंबे सूखे दौर के कारण किसान चिंतित हैं और सभी बर्फबारी का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि शिमला स्थित मौसम विभाग ने 16 से 21 जनवरी के बीच हिमाचल के कुछ हिस्सों में बर्फबारी का अनुमान जताया है, जिससे किसानों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को थोड़ी उम्मीद जरूर मिली है. तब तक पूरा इलाका बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है.

Published: 23 Jan, 2026 | 10:30 PM

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