IMD ने जारी किया मौसम अपडेट, इस बार ज्यादा पड़ेगी गर्मी.. 31 मई तक लू का रहेगा भीषण प्रकोप

मौसम विभाग के अनुसार मार्च महीने में देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान  सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है. वहीं, न्यूनतम तापमान ज्यादातर इलाकों में सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों में ऐसा नहीं होगा. मार्च में अगर तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है.

नोएडा | Updated On: 1 Mar, 2026 | 07:34 AM

Weather Updates: भारत में आने वाले महीनों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने का अनुमान है. इससे बिजली की मांग बढ़ सकती है और लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने शनिवार को ऑनलाइन ब्रीफिंग में कहा कि 31 मई तक के तीन महीनों में देश के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या बढ़ सकती है. इस दौरान अधिकतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की पूरी संभावना है.

ऐसी स्थिति में देश में बिजली की मांग बढ़ सकती है. ज्यादा गर्मी पड़ने पर पीक समय में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है. अगर तापमान लंबे समय तक ऊंचा रहता है तो इसका असर गांवों की आय पर भी पड़ेगा और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इससे महंगाई को काबू में रखने की सरकार की कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं.

न्यूनतम तापमान ज्यादातर इलाकों में ज्यादा रहेगा

हालांकि मौसम विभाग के अनुसार मार्च महीने में देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान  सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है. वहीं, न्यूनतम तापमान ज्यादातर इलाकों में सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों में ऐसा नहीं होगा. मार्च में अगर तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है, तो सर्दियों में बोई गई फसलों के लिए खतरा पैदा हो सकता है. इस समय फसलें विकास के अहम चरण में होती हैं और ज्यादा गर्मी पड़ने से उनकी पैदावार कम हो सकती है और गुणवत्ता भी खराब हो सकती है.

अधिक गर्मी से गेहूं उत्पादन हो सकता है प्रभावित

अगर अगले महीने लंबे समय तक गर्मी बनी रहती है, तो भारत में गेहूं का उत्पादन पिछले सीजन के रिकॉर्ड स्तर से नीचे जा सकता है. इससे सरकार के लिए पर्याप्त भंडार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन कल्याणकारी योजनाओं के लिए जिनमें हर महीने करीब 80 करोड़ लोगों को तय मात्रा में मुफ्त अनाज दिया जाता है. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक भारत ने हाल ही में कोटा सिस्टम के तहत सीमित मात्रा में गेहूं के निर्यात  की अनुमति दी है, जिससे तीन साल से ज्यादा समय से लगे प्रतिबंधों में आंशिक ढील मिली है. लेकिन अगर इस बार फसल कम होती है, तो सरकार इस फैसले पर फिर से विचार कर सकती है. इससे बाजार में आपूर्ति और कम हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब मौसम की अनिश्चितता पहले से ही बाजार को प्रभावित कर रही है.

ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य रहने की संभावना है

मौसम विभाग के अनुसार मार्च में देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य रहने की संभावना है. लेकिन अगर फसल के अहम समय में बारिश कम हुई, तो किसानों को सिंचाई पर ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा. इससे उनकी लागत बढ़ सकती है, जबकि पहले से ही बदलते मौसम के कारण उनकी कमाई पर दबाव बना हुआ है. जलवायु परिवर्तन  के लिहाज से भारत उन देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. यहां हीटवेव, बाढ़ और गंभीर सूखे जैसी चरम मौसम घटनाएं अब पहले से ज्यादा बार हो रही हैं. हर साल इन कारणों से सैकड़ों लोगों की जान जाती है और खेती की उत्पादकता भी प्रभावित होती है.

ज्यादा गर्मी पड़ने पर बिजली की मांग बढ़ती है

खेती के अलावा, मौसम की यह अनिश्चितता ऊर्जा व्यवस्था पर भी दबाव डालती है. ज्यादा गर्मी पड़ने पर बिजली की मांग बढ़ती है, जिससे जीवाश्म ईंधन की खपत बढ़ती है. वहीं, जब बांधों में पानी कम हो जाता है तो जलविद्युत उत्पादन घट जाता है, जिससे बिजली आपूर्ति पर और असर पड़ता है. साथ ही आईएमडी ने कहा है कि मार्च से मई के बीच महाराष्ट्र में रात का तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा. साथ ही, राज्य के ज्यादातर हिस्सों में दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है.

 

Published: 1 Mar, 2026 | 07:30 AM

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