25 मई से शुरू होगा नौतपा, 9 दिनों तक बरसेगी आग.. जानिए क्यों इन दिनों तपने लगती है धरती

मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में तापमान और बढ़ सकता है. हाल ही में दिल्ली का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था और नौतपा के दौरान इसमें और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिल सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 21 May, 2026 | 11:19 AM

Nautapa 2026: देशभर में इस समय लोग भीषण गर्मी और लू से परेशान हैं. दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई इलाकों में तापमान लगातार बढ़ रहा है. मौसम विभाग पहले ही हीटवेव को लेकर चेतावनी जारी कर चुका है. इसी बीच अब 25 मई से ‘नौतपा’ शुरू होने जा रहा है, जो 2 जून तक चलेगा. माना जाता है कि इन नौ दिनों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है और धरती सबसे ज्यादा तपती है.

क्या होता है नौतपा?

‘नौतपा’ का मतलब है नौ दिनों तक पड़ने वाली तेज और झुलसा देने वाली गर्मी. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य ज्येष्ठ माह में रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा की शुरुआत होती है. इस साल सूर्य 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. मान्यता है कि इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है. इसी वजह से इन दिनों में लू चलने और गर्म हवाओं का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है.

दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में बढ़ेगी तपिश

मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में तापमान और बढ़ सकता है. हाल ही में दिल्ली का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था और नौतपा के दौरान इसमें और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिल सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर के समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

मानसून और खेती से भी जुड़ा है नौतपा

नौतपा को सिर्फ गर्मी से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि इसका कृषि और मानसून से भी गहरा संबंध माना जाता है. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार जितनी ज्यादा गर्मी नौतपा के दौरान पड़ती है, उतना ही अच्छा मानसून आने की संभावना बढ़ जाती है. गर्म और शुष्क मौसम के कारण समुद्र का पानी तेजी से गर्म होता है, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया तेज होती है. इसका फायदा खरीफ फसलों को अच्छी बारिश के रूप में मिलता है.

धार्मिक दृष्टि से भी खास माने जाते हैं ये दिन

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं. लेकिन जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो उनकी तेज गर्मी के कारण चंद्रमा की शीतलता कम हो जाती है. इसी वजह से गर्मी का प्रभाव अधिक बढ़ जाता है. नौतपा के दौरान सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. लोग तांबे के लोटे में जल, गुड़, चावल, रोली और लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं. जरूरतमंदों को ठंडा पानी, शरबत, सत्तू, फल और पंखे दान करने की भी परंपरा है.

सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा के दौरान शरीर को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है. लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए. ज्यादा पानी पीना, हल्के रंग के कपड़े पहनना और धूप में छाता या गमछे का इस्तेमाल करना जरूरी माना गया है. बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का इस दौरान विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. लंबे समय तक धूप में रहने से हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है.

इन कामों से बचने की सलाह

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, सगाई और दूसरे मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए. साथ ही नया और बड़ा काम शुरू करने को भी शुभ नहीं माना जाता. हालांकि वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो नौतपा गर्मी का वह दौर है जब मौसम सबसे ज्यादा कठोर हो जाता है और लोगों को अपनी सेहत व दिनचर्या को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

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Published: 21 May, 2026 | 11:17 AM

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