क्या आने वाला है 70 साल का सबसे ताकतवर सुपर अल नीनो? सूखा, बाढ़ और हीटवेव का बढ़ सकता है कहर

Super El Nino 2026: दुनिया में सुपर अल नीनो का खतरा बढ़ता दिख रहा है. ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी के अनुसार प्रशांत महासागर तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे आने वाले महीनों में सूखा, हीटवेव, बाढ़ और भारी बारिश जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 1 Jul, 2026 | 05:56 PM

Super El Nino: दुनिया का मौसम एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है. ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी (BoM) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत महासागर का तापमान लगातार बढ़ रहा है और अल नीनो (El Nino) की स्थिति अब पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले महीनों में दुनिया सुपर अल नीनो (Super El Nino) का सामना कर सकती है. इसका असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, पानी, तापमान और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है.

तेजी से मजबूत हो रहा है अल नीनो

ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी के हवाले से बिजनेस लाइन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि, मध्य प्रशांत महासागर का समुद्री सतह तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच चुका है. पिछले दो हफ्तों में समुद्र का तापमान करीब 0.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है. वहीं, नीनो 3.4 इंडेक्स 28 जून 2026 तक +1.24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अल नीनो घोषित होने की सीमा +0.80 डिग्री सेल्सियस मानी जाती है. मौसम के ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय मॉडल भी आने वाले महीनों में समुद्र के और गर्म होने की संभावना जता रहे हैं. यही वजह है कि सुपर अल नीनो बनने की आशंका बढ़ती जा रही है.

मौसम के संकेत भी दे रहे हैं चेतावनी

सिर्फ समुद्र का तापमान ही नहीं, बल्कि वातावरण में भी अल नीनो के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं. प्रशांत महासागर की ट्रेड विंड्स यानी व्यापारिक हवाएं सामान्य से कमजोर पड़ गई हैं और कई इलाकों में उनकी दिशा भी बदल गई है.

इसके अलावा सदर्न ऑसिलेशन इंडेक्स (SOI) भी 27 जून को -25.2 दर्ज किया गया, जो मजबूत अल नीनो की स्थिति का संकेत माना जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि, समुद्र और वातावरण दोनों एक-दूसरे को और मजबूत कर रहे हैं, जिससे साल के आखिर तक अल नीनो बने रहने की संभावना है.

भारत के मॉनसून में IOD निभा सकता है बड़ी भूमिका

हालांकि भारत के लिए पूरी तस्वीर अभी चिंता वाली नहीं है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole-IOD) फिलहाल सामान्य स्थिति में है. इसका इंडेक्स -0.02 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. लेकिन कई मौसम मॉडल बता रहे हैं कि आने वाले महीनों में पॉजिटिव IOD विकसित हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो हिंद महासागर से भारत की ओर ज्यादा नमी पहुंचेगी और अल नीनो के नकारात्मक असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इससे मॉनसून को भी कुछ राहत मिल सकती है.

समुद्र का तापमान पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर

BoM और यूरोप की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के समुद्र लगातार गर्म होते जा रहे हैं. 21 जून 2026 को वैश्विक समुद्री सतह का औसत तापमान 20.86 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस समय के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. पिछले तीन सालों से दुनिया के अधिकांश महासागर सामान्य से काफी अधिक गर्म बने हुए हैं. यह जलवायु परिवर्तन और अल नीनो, दोनों के संयुक्त असर का संकेत हो सकता है.

अगर सुपर अल नीनो आया तो क्या होगा?

सुपर अल नीनो बनने पर दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है. इसके कारण लंबे समय तक हीटवेव, कई क्षेत्रों में सूखा, कहीं बहुत ज्यादा बारिश और बाढ़, तेज चक्रवात, ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और समुद्री जीवों पर असर जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं. खेती और खाद्य उत्पादन भी इससे प्रभावित हो सकते हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़