वैज्ञानिकों की चेतावनी, अधिक तापमान से गेहूं के दाने का वजन हो सकता है कम.. खेत में छिड़कें पोटैशियम नाइट्रेट
पंजाब में फरवरी के बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल पर हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ गया है. विशेषज्ञों ने हल्की सिंचाई और 2 फीसदी पोटैशियम नाइट्रेट के छिड़काव की सलाह दी है. 34.89 लाख हेक्टेयर में बोई गई फसल से 12.5 मिलियन टन उत्पादन की उम्मीद है.
Wheat Farming: पंजाब में इस साल फरवरी में तापमान पिछले साल के मुकाबले 2-4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा बढ़ गया है. कृषि विशेषज्ञों ने पंजाब के किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी गेहूं की फसल को गर्मी के असर से बचाने के लिए तुरंत कदम उठाएं. बाल निकलने और दाना भरने के समय अगर तापमान ज्यादा हो जाए तो दाने का वजन कम हो सकता है, फसल जल्दी पक सकती है और उपज व गुणवत्ता दोनों घट सकती हैं.
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के एक्सटेंशन एजुकेशन निदेशक डॉ. माखन सिंह भुल्लर ने किसानों को हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है, ताकि फसल ठंडी रहे और उस पर गर्मी का तनाव कम पड़े. इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरि राम ने सलाह दी कि किसान 2 फीसदी पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) का घोल दो बार छिड़कें. यह घोल 4 किलो पोटैशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में मिलाकर तैयार किया जाता है. इसका छिड़काव बूट लीफ और फूल आने (एन्थेसिस) की अवस्था में, खासकर शाम के समय करना बेहतर रहता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों से ज्यादा तापमान के बुरे असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है, जिससे दाने का वजन बेहतर रहेगा और उपज को नुकसान से बचाया जा सकेगा. हालांकि किसान अचानक बढ़ी गर्मी को लेकर चिंतित हैं. लुधियाना जिले के किसान बलदेव सिंह ने कहा कि हमने फसल सही समय पर बोई थी, लेकिन अचानक बढ़ी गर्मी चिंता का कारण है. अगर सिंचाई और छिड़काव से पैदावार बच सकती है, तो हम जरूर यह सलाह मानेंगे.
अभी गेहूं की फसल ठीक दिख रही है
मोगा के किसान गुरप्रीत सिंह ने भी यही चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अभी गेहूं की फसल ठीक दिख रही है, लेकिन अगर गर्मी ऐसे ही बढ़ती रही तो दाने सिकुड़ सकते हैं. हम यूनिवर्सिटी की सलाह मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमें समय पर सही मार्गदर्शन मिलना बहुत जरूरी है.
34.89 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती
पंजाब में गेहूं रबी मौसम की मुख्य फसल है और यह राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम है. साल 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में करीब 34.89 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 1 फीसदी कम है. हालांकि क्षेत्रफल में हल्की कमी आई है, फिर भी बेहतर बीज और आधुनिक तकनीकों के कारण उत्पादन स्थिर बना हुआ है. अनुमान है कि इस सीजन में करीब 12.5 मिलियन मीट्रिक टन की अच्छी पैदावार हो सकती है. वहीं, औसतन 19-21 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन की संभावना है.