कपास कचरे की कीमत में बढ़ोतरी, 128 रुपये किलो हुआ रेट.. उत्पादन प्रभावित

तमिलनाडु की 250 से अधिक ओपन-एंड स्पिनिंग मिलें कपास कचरे की कीमत 105 से बढ़कर 128 रुपये प्रति किलो होने से संकट में हैं. कच्चे माल की लागत बढ़ने के बावजूद यार्न कीमतें नहीं बढ़ रहीं, जिससे मिलें घाटे में हैं. उद्योग ने पारदर्शी टेंडर प्रणाली और कीमत घटाने की मांग की है.

नोएडा | Updated On: 13 Feb, 2026 | 05:05 PM

Cotton Production: मिलनाडु की 250 से अधिक ओपन-एंड (OE) स्पिनिंग मिलों का उत्पादन हाल ही में कपास कचरे की कीमत 105 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 128 रुपये प्रति किलो होने से प्रभावित हुआ है. ये मिलें स्पिनिंग मिलों से आने वाले कपास कचरे से ग्रे कॉटन यार्न तैयार करती हैं, जो कोयंबटूर के सोमनूर, पल्दादम, अविनाशी, मंगालम और तिरुपुर-एरोड क्षेत्रों में पावरलूम्स को सप्लाई की जाती हैं. यहां यह यार्न ग्रे कपड़े में बुना जाता है और उत्तर भारत में बेचा जाता है.

दो महीने पहले, स्पिनिंग मिलों ने कॉम्बर नोइल कचरे की कीमत 105 रुपये प्रति किलो रखी थी, जो अब 128 रुपये प्रति किलो कर दी गई है. इस तेज बढ़ोतरी से OE मिलों और पावरलूम बुनकरों को भारी नुकसान हुआ है. OSMA के अध्यक्ष जी. अरुलमोजी ने कहा कि कपास की कीमत पिछले हफ्ते 1,600 रुपये प्रति कैंडी तक गिर गई थी, फिर भी कचरे की बढ़ी कीमत ने पूरे टेक्सटाइल चेन को प्रभावित किया है. OE मिलों ने इसके जवाब में यार्न के दाम बढ़ाए हैं. 20s वेफ्ट यार्न 137 रुपये से 152 रुपये और 20s वार्प यार्न 158 रुपये से 168 रुपये प्रति किलो. इसके चलते OE मिलें भारी घाटे में काम कर रही हैं. अरुलमोजी ने स्पिनिंग मिलों से अपील की है कि वे कचरे की कीमत 20 रुपये प्रति किलो कम करें, ताकि पूरे टेक्सटाइल  चेन में सुचारू संचालन हो सके.

कपास की कीमत 51,000 रुपये प्रति कैंडी तक गिर गई

इसके अलावा तमिलनाडु की स्पिनिंग मिलें कपास कचरे पर 1 रुपये प्रति किलो पैकिंग चार्ज भी वसूल रही हैं, जो देश के अन्य राज्यों में नहीं लिया जाता. अन्य राज्यों में कपास, पॉलिएस्टर या विस्कोस जैसे कच्चे माल पर पैकिंग चार्ज नहीं लगाया जाता. मांग की गई है कि तमिलनाडु की मिलें आगे से बिना पैकिंग शुल्क के ही कपास कचरा बेचें. रीसाइकिल टेक्सटाइल फेडरेशन के अध्यक्ष एम. जयबाल ने कहा कि नवंबर में जब कपास की कीमत  51,000 रुपये प्रति कैंडी तक गिर गई थी, तब भी कपास कचरे की कीमत घटाने के बजाय 107 रुपये से बढ़ाकर 115 रुपये और अब 123-128 रुपये प्रति किलो कर दी गई, खासकर कॉम्बर वेस्ट के लिए. इससे OE मिलों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है और संचालन मुश्किल होता जा रहा है.

वेफ्ट यार्न 148-150 रुपये प्रति किलो थी

उन्होंने कहा कि दिवाली के समय 20s वार्प यार्न की कीमत करीब 165 रुपये प्रति किलो और वेफ्ट यार्न 148-150 रुपये प्रति किलो थी. अब कचरे की कीमत 23 रुपये प्रति किलो बढ़ने के बावजूद मिलों को वार्प यार्न 165 रुपये से कम और वेफ्ट यार्न 155 रुपये से कम में बेचना पड़ रहा है. कच्चे माल की बढ़ी लागत के अनुसार यार्न की कीमत नहीं बढ़ी है, जिससे उत्पादन लागत से कम दाम पर बिक्री करनी पड़ रही है. पिछले तीन महीनों से OE मिलें लगातार घाटे में चल रही हैं. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि स्पिनिंग मिलों को निर्देश देकर कपास कचरे की बिक्री पारदर्शी टेंडर प्रणाली के जरिए कराई जाए, जैसा कि कापस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) कपास बिक्री में करता है.

Published: 13 Feb, 2026 | 10:30 PM

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