देश के कपास बाजार में इन दिनों हलचल तेज है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपास की कीमतों में नरमी आने के बाद अब इसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखने लगा है. ऐसे में भारतीय कपास निगम (Cotton Corporation of India – CCI) ने कपास फाइबर की कीमतों में कटौती का बड़ा फैसला लिया है. इस कदम का मकसद उद्योग की सुस्त मांग को गति देना और निगम के पास मौजूद कपास की बिक्री को बढ़ाना है.
कपास की कीमतों में कितनी हुई कटौती?
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, CCI ने 2025-26 सीजन की कपास की कीमतों में 1,400 से 1,700 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी = 356 किलोग्राम) तक की कटौती की है. यह कटौती अलग-अलग किस्मों और गुणवत्ता के आधार पर की गई है. इसके साथ ही, निगम ने खरीदारों को दी जाने वाली बड़ी राहत के तौर पर लिफ्टिंग पीरियड भी घटा दिया है. पहले जहां खरीदारों को कपास उठाने के लिए 60 दिन मिलते थे, अब यह अवधि घटाकर 30 दिन कर दी गई है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप लिया गया फैसला
CCI के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता ने साफ किया कि कपास के दामों में की गई यह कटौती किसी दबाव में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों को देखते हुए की गई है. उनके अनुसार, “दुनियाभर में कपास की कीमतें नरम हुई हैं और उसी के अनुरूप घरेलू कीमतों में सुधार किया गया है, ताकि बाजार संतुलन बना रहे.”
बिक्री उम्मीद से कमजोर, अब तक कितनी हुई बिक्री?
CCI ने 19 जनवरी 2026 से 2025-26 फसल की बिक्री शुरू की थी. हालांकि, उद्योग से अब तक जो प्रतिक्रिया मिली है, वह अपेक्षाकृत कमजोर रही है. अब तक निगम लगभग 4 लाख गांठ (बेल) ही बेच पाया है. उद्योग की ओर से सीमित खरीद का एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि खुले बाजार में कुछ जगहों पर कीमतें CCI से कम चल रही हैं.
खरीद अभियान अपने अंतिम चरण में
CCIकी कपास खरीद इस सीजन में मजबूत रही है. अब तक निगम 93 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलो) से अधिक कपास की खरीद कर चुका है. यह खरीद मुख्य रूप से तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात में की गई है. ललित कुमार गुप्ता के अनुसार, यह खरीद प्रक्रिया फरवरी के अंत तक जारी रहेगी.
रोजाना आवक बनी हुई है मजबूत
बाजार में रोजाना कपास की आवक अभी भी अच्छी बनी हुई है. CCI के अनुसार, दैनिक आवक 1.25 लाख से 1.5 लाख गांठ के बीच बनी हुई है. हालांकि, उद्योग पहले खुले बाजार से खरीद करना पसंद करता है और आमतौर पर CCI से खरीदारी मार्च के बाद तेज होती है.
खुले बाजार में कीमतें कम, व्यापारियों की पसंद
रामानुज दास बूथ, जो कर्नाटक के रायचूर में एक सोर्सिंग एजेंट हैं, बताते हैं कि महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना में आवक अच्छी है, जबकि कर्नाटक में धीरे-धीरे घट रही है. उनके अनुसार, “इस समय खुले बाजार में कपास की कीमतें CCI के भाव से कम हैं, इसलिए व्यापारी अपनी पसंद की कपास सीधे बाजार से खरीद रहे हैं.”
कपास उत्पादन का अनुमान बढ़ा
इस बीच, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने 2025-26 के लिए कपास उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर 317 लाख गांठ कर दिया है. यह पहले के अनुमान से करीब 7.5 लाख गांठ (लगभग 2.5%) अधिक है. उत्पादन में यह बढ़ोतरी खासतौर पर महाराष्ट्र और तेलंगाना में उम्मीद से बेहतर पैदावार के कारण हुई है.
खपत, आयात और निर्यात का पूरा हिसाब
सीएआई के अध्यक्ष विनय एन कोटक के मुताबिक, 2025-26 सीजन में सितंबर तक कुल कपास खपत 305 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 314 लाख गांठ थी. जनवरी के अंत तक खपत लगभग 104 लाख गांठ आंकी गई है.
इस सीजन में कपास का आयात रिकॉर्ड स्तर पर 50 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है. जनवरी के अंत तक ही 35 लाख गांठ का आयात हो चुका है, जबकि निर्यात करीब 6 लाख गांठ रहा है.
सीजन के अंत में बड़ा सरप्लस
सीएआई का अनुमान है कि 2025-26 सीजन के अंत (सितंबर) तक कपास का सरप्लस 122.59 लाख गांठ रहेगा, जो पिछले सीजन के 78.59 लाख गांठ के मुकाबले 56 प्रतिशत ज्यादा है. सीजन के अंत में क्लोजिंग स्टॉक 107.59 लाख गांठ रहने की संभावना है, जो पिछले साल से करीब 47 लाख गांठ अधिक है.