19 जनवरी से शुरू होगी 2025-26 सीजन की कपास बिक्री, किसानों और उद्योग की निगाहें CCI पर

CCI अब तक करीब 80 लाख गांठ कपास की खरीद कर चुकी है. एक गांठ का वजन लगभग 170 किलो होता है. अभी भी तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में खरीद प्रक्रिया जारी है. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में सरकारी भंडार और बढ़ सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 17 Jan, 2026 | 10:42 AM

CCI cotton sale: देश के कपास बाजार में आने वाले दिनों में हलचल तेज होने वाली है. 2025-26 के कपास सीजन के बीच सरकार की अहम एजेंसी कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने बड़ा फैसला लिया है. CCI ने घोषणा की है कि वह अगले सप्ताह यानी 19 जनवरी से चालू सीजन में खरीदी गई कपास की बिक्री शुरू करेगी. इस फैसले का सीधा असर कपास की कीमतों, कपड़ा उद्योग और किसानों तीनों पर पड़ने वाला है.

19 जनवरी से शुरू होगी कपास की बिक्री

CCI ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी दी है कि 2025-26 सीजन के दौरान खरीदी गई पूरी तरह प्रेस की गई कपास गांठों की बिक्री 19 जनवरी से शुरू की जाएगी. बिक्री की शर्तें भी सार्वजनिक कर दी गई हैं, ताकि खरीदार पहले से तैयारी कर सकें. बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि CCI के इस कदम के बाद कीमतों को लेकर नई दिशा तय होगी.

अब तक 80 लाख गांठ की खरीद

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, CCI अब तक करीब 80 लाख गांठ कपास की खरीद कर चुकी है. एक गांठ का वजन लगभग 170 किलो होता है. अभी भी तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में खरीद प्रक्रिया जारी है. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में सरकारी भंडार और बढ़ सकता है, जिससे बाजार में आपूर्ति की स्थिति और स्पष्ट होगी.

कीमतों में हालिया तेजी की वजह

पिछले कुछ हफ्तों में कपास की कीमतों में मजबूती देखने को मिली है. कपास के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर निकल आए हैं. इसकी एक बड़ी वजह कपास बीज यानी कॉटनसीड के दामों में आई तेजी है. बीते एक महीने में कॉटनसीड की कीमतें करीब 700 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गई हैं. जहां पहले ये 3,600 से 3,700 रुपये के आसपास थीं, वहीं अब ये 4,100 रुपये के स्तर पर बनी हुई हैं.

कपास की कीमतों में भी इसी का असर दिखा है. एक कैंडी (356 किलो) कपास के दाम करीब 4,000 रुपये बढ़कर 55,000 से 56,000 रुपये के स्तर तक पहुंच गए हैं. कच्ची कपास के भाव भी 7,700 रुपये से बढ़कर 8,200–8,300 रुपये तक पहुंच चुके हैं.

आयात नीति का भी पड़ा असर

कीमतों में इस मजबूती के पीछे सरकार का एक और फैसला अहम रहा है. सरकार ने 31 दिसंबर के बाद कपास आयात पर दी जा रही शुल्क छूट खत्म कर दी है. इससे पहले अगस्त के अंत में सरकार ने ड्यूटी छूट दी थी, ताकि कपड़ा और स्पिनिंग मिलों को सस्ता कच्चा माल मिल सके. अब छूट खत्म होने से घरेलू बाजार को सहारा मिला है.

खरीदार कर रहे हैं CCI के दाम का इंतजार

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि CCI द्वारा बिक्री शुरू करने की घोषणा के बाद खरीदार फिलहाल इंतजार की स्थिति में हैं. सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकारी एजेंसी किस कीमत पर कपास बाजार में उतारेगी. इससे निजी व्यापारियों और मिलों की खरीद रणनीति भी तय होगी.

उत्पादन अनुमान में भी बढ़ोतरी

इस बीच कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने 2025-26 के लिए कपास उत्पादन का अनुमान भी बढ़ा दिया है. संगठन ने उत्पादन अनुमान में करीब 2.5 प्रतिशत या 7.5 लाख गांठ की बढ़ोतरी की है. अब कुल उत्पादन 317 लाख गांठ रहने का अनुमान है. यह बढ़ोतरी महाराष्ट्र और तेलंगाना में उम्मीद से बेहतर उत्पादन के कारण की गई है.

रिकॉर्ड आयात और बड़ा सरप्लस

सीएआई के अनुसार, 2025-26 सीजन के अंत तक देश में 122.59 लाख गांठ कपास का सरप्लस रह सकता है. यह आंकड़ा इस साल हुए रिकॉर्ड आयात की वजह से भी बढ़ा है. 31 दिसंबर तक 31 लाख गांठ कपास का आयात हो चुका है और पूरे सीजन में आयात 50 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है.

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