गेहूं और उससे बने उत्पादों पर DGFT का बड़ा फैसला, 5 लाख टन निर्यात की मिली मंजूरी

DGFT ने गेहूं की कटाई से पहले गेहूं और उससे बने उत्पादों के 5 लाख टन निर्यात को मंजूरी दी है. इससे 2022 का बैन आंशिक रूप से हटा है. फैसले से विदेशी बाजारों में भारतीय ब्रांड्स को फायदा मिलेगा, हालांकि परमिट और समयसीमा को लेकर इंडस्ट्री में अभी भी चिंता बनी हुई है.

नोएडा | Updated On: 17 Jan, 2026 | 08:16 PM

Wheat Export: गेहूं की कटाई के मौसम शुरू होने से पहले भारत की विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने गेहूं और उससे बने उत्पादों के 5 लाख टन निर्यात की अनुमति दे दी है. यह 2022 में लगाए गए बैन को आंशिक रूप से हटाने जैसा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने परिचित ब्रांड्स का आटा, मैदा और सूजी आसानी से खरीद पाएंगे. DGFT की नोटिफिकेशन के मुताबिक, HS कोड 1101 के तहत गेहूं का आटा और उससे बने उत्पाद (आटा, मैदा, सूजी, संपूर्ण आटा आदि) का निर्यात सामान्यतः प्रतिबंधित रहेगा. लेकिन अब, मौजूदा नियमों के अलावा, 5 लाख टन तक के गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों का निर्यात अनुमति प्राप्त होगा.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह 5 लाख टन का कोटा DGFT द्वारा जारी किए गए निर्यात परमिट (Export Authorisation) के तहत ही लिया जा सकेगा और इसके नियम अलग से नोटिफाई किए जाएंगे. खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2025 में DGFT को इंडस्ट्री की मांग भेजी थी कि आटा, सूजी और मैदा जैसे गेहूं उत्पादों का निर्यात अनुमति दी जाए. शुरुआत में 10 लाख टन की सीमा रखी जा सकती है.

2024-25 रबी सीजन में रकबा 328.04 लाख हेक्टेयर था

रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी मंत्रालय को सुझाव दिया था कि निर्यात की अनुमति दी जाए, क्योंकि देश में गेहूं की अच्छी खासी बचत है और उत्पादन का अनुमान भी मजबूत है. मई 2022 से गेहूं का निर्यात  बैन है और अक्टूबर 2022 से गेहूं उत्पादों की शिपमेंट पर रोक जारी है. भारत में 2024-25 में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 1175.4 लाख टन रहा और सरकार ने 2025-26 में 1190 लाख टन का लक्ष्य रखा है. कृषि मंत्रालय के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, गेहूं की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है. 9 जनवरी तक 334.17 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया, जबकि पूरे 2024-25 रबी सीजन में यह 328.04 लाख हेक्टेयर था.

5 लाख टन का पूरा निर्यात करना मुश्किल होगा

सरकार ने 2024-25 की फसल से 300 लाख टन गेहूं खरीदा, जो पिछले चार साल में सबसे ज्यादा है. 2022 से गेहूं और गेहूं उत्पादों पर रोक के कारण, सरकार ने कीमतों को कंट्रोल में रखा है, सिर्फ एक छोटा समय छोड़कर. इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि भारत के बैन के बाद मध्य पूर्व में कई फ्लोर मिल्स खुल गई हैं, ताकि दुनिया भर में 4 करोड़ भारतीयों की मांग पूरी हो सके. अब गेहूं उत्पादों  की अनुमति मिलने से सिर्फ मौजूदा ब्रांड्स जैसे आशीर्वाद, फॉर्च्यून या राजधानी को फायदा होगा. नए मिलर्स के लिए तुरंत बड़े ऑर्डर मिलना मुश्किल हो सकता है. एक बड़े ब्रांड के अधिकारी ने कहा कि सरकार अभी तक यह नहीं बताई है कि परमिट कब जारी होंगे और कितने समय तक वैध रहेंगे. अगर 31 मार्च तक ही अनुमति मिलती है, तो 5 लाख टन का पूरा निर्यात करना मुश्किल होगा. 

Published: 17 Jan, 2026 | 06:50 PM

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