त्योहारों का मौसम आते ही नारियल तेल की कीमतें एक बार फिर से चर्चा में हैं. खासकर केरल में ओणम त्योहार के दौरान नारियल तेल की मांग हमेशा तेजी से बढ़ जाती है. इस बार भी यही हुआ है–खुदरा बाजार में नारियल तेल की कीमतें करीब 390 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं, जबकि थोक बाजार में यह 373 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है. वहीं, कॉपरा (सूखा नारियल) की कीमतें भी बढ़कर करीब 221 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं.
कीमतें क्यों बढ़ीं?
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, तेल व्यापारियों का कहना है कि तमिलनाडु और कर्नाटक से नारियल की नई आवक शुरू होने के बाद कुछ हफ्तों पहले तक दामों में गिरावट देखी जा रही थी. उस समय नारियल तेल 400 रुपये से नीचे आकर लगभग 350 रुपये प्रति लीटर तक बिकने लगा था. लेकिन जैसे ही ओणम की तैयारियां शुरू हुईं और उत्तर भारत में आने वाले त्योहारी सीजन (नवरात्रि, दीपावली आदि) की मांग का अनुमान बढ़ा, किसानों और व्यापारियों ने अपना माल रोकना शुरू कर दिया.
यही वजह है कि कीमतें नीचे गिरने की बजाय फिर से चढ़ गईं. विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक नए नारियल बड़ी मात्रा में बाजार में नहीं आते, तब तक कीमतों में राहत मिलना मुश्किल है.
स्थानीय व्यापारियों की मजबूरी
कई व्यापारी बताते हैं कि उन्होंने कॉपरा की खरीद 250 रुपये से 300 रुपये प्रति किलो के भाव से की है. ऐसे में अगर वे तेल 350 रुपये से नीचे बेचते हैं तो उन्हें घाटा होगा. यही कारण है कि कीमतें एक स्तर से नीचे नहीं गिर पा रहीं.
इसके अलावा, कच्चे नारियल की आवक में कमी भी दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह है. जब बाजार में माल कम पहुंचेगा और मांग ज्यादा होगी, तो दाम अपने आप ऊपर चले जाएंगे.
सरकार की कोशिश
राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नारियल तेल को सब्सिडी रेट पर 349 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध कराया है. त्योहार को देखते हुए इसे और घटाकर 339 रुपये प्रति लीटर भी किया गया है. इससे आम उपभोक्ता को थोड़ी राहत तो मिली है, लेकिन बाजार में कुल मिलाकर नारियल तेल के दाम अब भी ऊंचे बने हुए हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें स्थिर रहेंगी या हल्की गिरावट तभी संभव है, जब तमिलनाडु और कर्नाटक से नारियल की नई आवक बड़े पैमाने पर हो. लेकिन फिलहाल, ओणम और आने वाले त्योहारी सीजन की वजह से मांग ऊंचाई पर है. इसलिए निकट भविष्य में कीमतें घटने की संभावना बहुत कम है.
किसानों और उपभोक्ताओं पर असर
किसानों के लिए यह स्थिति फायदेमंद है, क्योंकि उन्हें अपनी फसल का अच्छा दाम मिल रहा है. वहीं उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ जरूर बढ़ रहा है, खासकर उन परिवारों का खर्च बढ़ गया है, जो नारियल तेल का रोजमर्रा में इस्तेमाल करते हैं.