महाराष्ट्र-तेलंगाना की बेहतर फसल से बढ़ा कपास उत्पादन, लेकिन आयात और स्टॉक ने बढ़ाई चुनौती

सरकार की ओर से दिसंबर 2025 तक दी गई ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा का असर साफ दिखा है. इस दौरान व्यापारियों और मिल मालिकों ने करीब 31 लाख गांठ कपास का आयात किया. पूरे सीजन में आयात का आंकड़ा लगभग 50 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है.

नई दिल्ली | Published: 15 Jan, 2026 | 08:39 AM

Cotton production 2025-26: देश में कपास की खेती और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए इस सीजन की तस्वीर थोड़ी मिली-जुली लेकिन राहत देने वाली कही जा सकती है. कपास बाजार पर नजर रखने वाली शीर्ष संस्था कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने 2025-26 के कपास सीजन के लिए अपने अनुमान में हल्का सुधार किया है. यह संकेत देता है कि कुछ राज्यों में पैदावार उम्मीद से बेहतर रही है, हालांकि चुनौतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं.

इस सीजन कितना हुआ कपास उत्पादन

CAI के मुताबिक 2025-26 सीजन, जो अक्टूबर से सितंबर तक चलता है, उसमें देश में कुल कपास उत्पादन 317 लाख गांठ रहने का अनुमान है. एक गांठ का वजन 170 किलो माना जाता है. यह अनुमान पहले के मुकाबले करीब 7.5 लाख गांठ ज्यादा है, यानी लगभग 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी.

संस्था का कहना है कि यह बढ़त बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन बाजार के लिहाज से इसे सकारात्मक संकेत माना जा सकता है. इस सीजन देश में कुल कपास उत्पादन लगभग 1.48 करोड़ टन रहने का अनुमान भी जताया गया है.

महाराष्ट्र और तेलंगाना बने सहारा

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, कपास उत्पादन में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र और तेलंगाना का रहा है. CAI को इन दोनों राज्यों से उम्मीद से बेहतर फीडबैक मिला है. महाराष्ट्र में उत्पादन अनुमान को 3 लाख गांठ बढ़ाया गया है, जबकि तेलंगाना में यह बढ़ोतरी 4.5 लाख गांठ की मानी गई है. इसके अलावा कर्नाटक में करीब 1 लाख गांठ और तमिलनाडु में लगभग 0.5 लाख गांठ का इजाफा दर्ज किया गया है. इन राज्यों में मौसम और खेतों की स्थिति अपेक्षाकृत अनुकूल रहने से उत्पादन सुधरा है.

मध्य प्रदेश और ओडिशा में घटती पैदावार

हालांकि हर जगह हालात एक जैसे नहीं रहे. मध्य प्रदेश और ओडिशा में कपास की पैदावार को लेकर चिंता जताई गई है. CAI का अनुमान है कि मध्य प्रदेश में उत्पादन करीब 1 लाख गांठ कम हो सकता है, जबकि ओडिशा में यह गिरावट लगभग 0.5 लाख गांठ की रह सकती है. इन राज्यों में कुछ इलाकों में मौसम की मार और लागत बढ़ने का असर फसल पर पड़ा है.

खपत में आई थोड़ी कमी

कपास की घरेलू खपत को लेकर भी इस बार थोड़ा कमजोर रुख देखा जा रहा है. CAI अध्यक्ष विनय कोटक के अनुसार, 2025-26 सीजन में कपास की कुल खपत करीब 305 लाख गांठ रहने का अनुमान है. यह आंकड़ा पिछले साल की 314 लाख गांठ की खपत से थोड़ा कम है. वहीं, दिसंबर के अंत तक करीब 76.25 लाख गांठ कपास की खपत हो चुकी थी. कपड़ा उद्योग में मांग की रफ्तार उतनी तेज नहीं रहने से खपत पर असर पड़ा है.

आयात बढ़ा, निर्यात घटा

सरकार की ओर से दिसंबर 2025 तक दी गई ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा का असर साफ दिखा है. इस दौरान व्यापारियों और मिल मालिकों ने करीब 31 लाख गांठ कपास का आयात किया. पूरे सीजन में आयात का आंकड़ा लगभग 50 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं निर्यात के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी कमजोर रही है. CAI ने इस सीजन के लिए कपास निर्यात का अनुमान घटाकर 15 लाख गांठ कर दिया है, जबकि पिछले साल यह 18 लाख गांठ था. दिसंबर के अंत तक सिर्फ 4.5 लाख गांठ ही निर्यात हो सका.

स्टॉक बढ़ने से बाजार पर दबाव

इस सीजन कुल कपास आपूर्ति 427.59 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की 392.59 लाख गांठ से काफी ज्यादा है. इसमें 60.59 लाख गांठ का शुरुआती स्टॉक, 317 लाख गांठ का उत्पादन और 50 लाख गांठ का आयात शामिल है.

सीजन के अंत तक करीब 122.59 लाख गांठ का सरप्लस रहने की संभावना जताई गई है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 56 प्रतिशत ज्यादा है. बढ़ते स्टॉक के चलते आने वाले समय में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.

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