दिल्ली सरकार राज्य में किसानों से गेहूं खरीद 5 साल बाद फिर से शुरू कर रही है. खराब मौसम से प्रभावित गेहूं की खरीद नियमों में सरकार ने ढील देने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के अन्नदाताओं के साथ सरकार पूरी प्रतिबद्धता से खड़ी है. उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत तक ‘चमक की कमी’ वाला गेहूं भी खरीदा जाएगा. इसके अलावा किसानों को फसल की बर्बादी से बचाने के लिए सिकुड़े और टूटे दानों की खरीद सीमा को भी बढ़ा दिया गया है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस वर्ष प्रतिकूल मौसम के कारण गेहूं की फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. ऐसे में किसानों की परेशानी कम करने और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचने (डिस्ट्रेस सेल) से बचाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने ठोस पहल की है. उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार की ओर से 21 अप्रैल को भारत सरकार को भेजे गए अनुरोध पर विचार करते हुए, रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2026-27 के लिए पूरी दिल्ली के सभी जिलों में गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में विशेष छूट को मंजूरी दी गई है, जो इस सीजन की शुरुआत से ही लागू होगी.
टूटा-सिकुड़ा और चमकहीन गेहूं की खरीद सीमा बढ़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधित व्यवस्था के तहत अब गेहूं में चमक की कमी (लस्टर लॉस) को 70 प्रतिशत तक स्वीकार किया जाएगा. साथ ही, सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा को पहले के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक कर दिया गया है ताकि मौसम से प्रभावित फसल भी खरीद के दायरे में आ सके. हालांकि गुणवत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि टूटे और हल्के टूटे दाने मिलाकर 6 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए.
गेहूं के अलग भंडारण की व्यवस्था करने के निर्देश
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा कि छूट के तहत खरीदा गया गेहूं अलग तरीके से संभाला जाएगा. इस गेहूं को सामान्य स्टॉक से अलग रखकर उसका अलग भंडारण किया जाएगा और उसका पूरा हिसाब-किताब अलग से रखा जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे. उन्होंने बताया कि इस तरह के गेहूं को प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले इस्तेमाल किया जाएगा, यानी इसे देर तक स्टोर नहीं रखा जाएगा.
दिल्ली में ही इस्तेमाल होगा यह गेहूं
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस प्रकार खरीदे गए गेहूं का उपयोग केवल दिल्ली के भीतर ही किया जाएगा, जिससे स्थानीय खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित हो सके. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भंडारण के दौरान इस गेहूं की गुणवत्ता में कोई गिरावट आती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की होगी. मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. यह निर्णय किसानों को राहत देने, उनकी मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
दिल्ली में 5 साल बाद गेहूं की सरकारी खरीद हो रही
दिल्ली सरकार ने पिछली बार 2020-21 में गेहूं की सरकारी खरीद की थी. अब 5 साल बाद फिर से राज्य में गेहूं खरीद का ऐलान किया गया है. इस बार 24 अप्रैल 2026 से नरेला और नजफगढ़ मंडियों में FCI के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की सरकारी खरीद फिर से शुरू हो गई है. दिल्ली में लगभग 29,000 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है, जिससे लगभग 80,000 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है. इस बार गेहूं खरीद करीब 21 हजार किसानों से की जा रही है.