अल नीनो के खतरे और खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन में आयोजित उच्च स्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक में देशभर की खरीफ तैयारियों का विस्तृत आकलन किया. बैठक में कम बारिश की आशंका वाले क्षेत्रों के लिए अग्रिम रणनीति, कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करने और किसानों तक समय पर तकनीकी सलाह पहुंचाने जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई.
बैठक में अल नीनो के खतरे पर विस्तार से चर्चा हुई. शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन जिलों में कम बारिश या वर्षा की अनियमितता की आशंका है, वहां पहले से पूरी तैयारी सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि ऐसे जिलों की पहचान कर राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसलवार कंटिंजेंसी प्लान तैयार किए जाएं. उनका कहना था कि किसी भी मौसमीय चुनौती की स्थिति में किसानों को तत्काल विकल्प, सलाह और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है.
केंद्रीय मंत्री ने जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतरफसली खेती और वैकल्पिक फसल प्रणाली को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि हर जिले की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए जोखिम वाले हर जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जानी चाहिए. इससे किसानों को मौसम के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी और उत्पादन पर प्रतिकूल असर भी सीमित रहेगा.
नौ-दस राज्यों में ज्यादा पड़ सकता है अल नीनो का असर
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि देश के 9 से 10 राज्यों में अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है. इसे देखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने संबंधित राज्यों के जिला अधिकारियों, कृषि विभागों, कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य विस्तार तंत्रों के साथ समन्वित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर किसानों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि उन्हें समय रहते यह जानकारी मिल सके कि उनके क्षेत्र में कौन–सी फसलें, तकनीकें और सावधानियां अधिक उपयोगी साबित होंगी.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों तक वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जानकारी पहुंचाई जानी चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि संभावित खतरे को बढ़ा–चढ़ाकर प्रस्तुत करने के बजाय समाधान आधारित और भरोसा पैदा करने वाला संदेश किसानों तक पहुंचाया जाए. उनका मानना है कि सही जानकारी और समय पर मार्गदर्शन से किसान किसी भी चुनौती का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं.
आने वाले खरीफ सीजन की प्रगति का आकलन
समीक्षा बैठक में खरीफ 2026 के लिए फसलवार लक्ष्य, बुवाई की तैयारी और राज्यों की प्रगति का भी आकलन किया गया. इस दौरान कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई. केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिक खेती, उन्नत किस्मों के चयन, मल्चिंग, नमी संरक्षण और अंतरफसली खेती जैसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि इन उपायों से कपास की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी सुधार होगा.
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति भी बैठक का प्रमुख विषय रही. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार अरहर, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दालों के उत्पादन में वृद्धि कर आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है. इसके लिए राज्यों के साथ मिलकर क्षेत्र विस्तार, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, फसल चक्र को बढ़ावा देने और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन बढ़ाना किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है.
उर्वरक की उपलब्धता सहित कई मामलों की समीक्षा
बैठक के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता, मंडियों के भाव, जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति और राज्यों में उपलब्ध स्टॉक की समीक्षा भी की गई. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है. मानसून के आगे बढ़ने के साथ राज्यों और जिलों तक आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी स्थानीय स्तर पर कमी की आशंका दिखाई दे, वहां पहले से पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्यों के कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान और तकनीकी ज्ञान का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब वह समय पर किसानों के खेतों तक पहुंचे. उन्होंने नियमित समीक्षा, सतत संवाद और जमीनी स्तर से प्राप्त फीडबैक के आधार पर खरीफ 2026 को सफल और सुरक्षित बनाने का आह्वान किया.
बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संभावित अल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और हर सप्ताह समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी. उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से मौसम संबंधी चुनौतियों का प्रभाव कम किया जा सकेगा तथा किसानों के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जाएगी.