हिमाचल प्रदेश में बीते एक सप्ताह रुक रुककर हो रही बारिश और तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. वहीं, कटाई के तैयार मटर को नुकसान हुआ है. किसानों का कहना है कि उत्पादन कम होगा और क्वालिटी भी प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. इसके साथ ही तेज आंधी से सेब और अन्य फलों को नुकसान हुआ है. फल समय से पहले ही टूटकर गिर गए हैं, जिससे बागवानी किसानों को आर्थिक चोट पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. किसानों ने राज्य सरकार और कृषि विभाग से नुकसान की भरपाई की मांग की है.
तेज बारिश और हिमपात से तापमान लुढ़का
हिमाचल प्रदेश के शिमला मौसम केंद्र के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सोमवार को दोपहर बाद बादलों के छाने के साथ तेज हवाएं और ओलावृष्टि के साथ बारिश हुई. कुफरी में 31, सुंदरनगर में 18, शिमला में 12, कांगड़ा में 11, मंडी में 5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई. ताजा हिमपात, ओलावृष्टि और वर्षा के बीच दिन के तापमान में एक से दो डिग्री की गिरावट आई है. ताजा पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 4 दिनों तक मौसम के ऐसे ही बने रहने का अनुमान है. जिसमें ऊचे क्षेत्रों में एक दो स्थानों पर हिमपात और वर्षा की संभावना जताई गई है.
फलों और सब्जी फसलों को ज्यादा नुकसान
ताजा हिमपात और बारिश से लोगों को गर्मी से जरूर राहत मिली है, लेकिन किसानों को भारी नुकसान हुआ है. हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में बेमौसम अचानक तेज बारिश के साथ आई आंधी ने फसलों को चौपट कर दिया है. चौपाल क्षेत्र में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों और बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. जहां बारिश से कुछ क्षेत्रों में राहत मिली, वहीं कई इलाकों में ओलावृष्टि ने सेब और नगदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया. सबसे ज्यादा सेब, आड़ू समेत अन्य फलों और मटर को नुकसान पहुंचा है.

बागवानों ने फसल नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से मांग की है.
कई इलाकों में मटर और सेब फसल चौपट
हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग के अनुसार शिमला, चौपाल, किन्नौर, ठियोग, कुफरी और रामपुर बुशहर में ओलावृष्टि से सेब की फसल को शुरुआती चरण में ही नुकसान पहुंचा है. जबकि, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फूल और फली की स्थिति में पहुंचे मटर को नुकसान हुआ है. इसके अलावा प्याज और अन्य मौसमी सब्जियों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.
किसानों ने नुकसान की भरपाई करने की मांग उठाई
स्थानीय बागवानों के अनुसार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मटर की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन ओलावृष्टि से उसे व्यापक क्षति हुई है. सेब के बागानों में भी ओलों की मार से फल घायल होकर जमीन पर गिर गए हैं, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हुए हैं. बागवानों का कहना है कि जिन बगीचों में एंटी हेल नेट लगी थीं, वहां नुकसान अपेक्षाकृत कम हुआ, जबकि बिना जालियों वाले बागानों में फसल को भारी क्षति पहुंची है. प्रभावित किसानों ने सरकार और प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है.