बिचौलियों की छुट्टी! अब कंपनियां सीधे FPO से खरीद रहीं फसल, किसानों को मिल रहा फायदा

सरकार का 10,000 एफपीओ बनाने का लक्ष्य अब पूरा हो चुका है. अब अगला कदम है इन एफपीओ की आमदनी को बढ़ाना और उन्हें लंबे समय तक सक्षम बनाना. इसके लिए सरकार तकनीकी मदद, मार्केटिंग ट्रेनिंग और कंपनियों से कनेक्शन देने पर लगातार काम कर रही है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 11 Jun, 2025 | 10:35 AM

देश में किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक नई और सकारात्मक शुरुआत हुई है. अब बड़ी कंपनियां सीधे किसानों के समूह यानी एफपीओ ( फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) से अनाज और फसलें खरीद रही हैं. इससे बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है और किसानों को सीधा और बेहतर दाम मिल रहा है.

सरकार की पहल से बदली तस्वीर

यह बदलाव सरकार द्वारा शुरू किए गए एक खास अभियान के बाद आया है. पिछले दो महीनों से कृषि मंत्रालय हर हफ्ते वेबिनार आयोजित कर रहा है, जहां एफपीओ और कंपनियों को आपस में जोड़ा जा रहा है. इससे कई एफपीओ को पहली बार पता चला कि वे मंडियों के बाहर भी सीधे बिक्री कर सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अमुसार इस सीजन में एफपीओ ने गेहूं जैसी फसलें सीधे कंपनियों को बेचकर बेहतर दाम पाए और परिवहन व मंडी शुल्क जैसे खर्च भी बचे.

कौन-कौन सी कंपनियां जुड़ी हैं?

इस नए मॉडल में अब कई बड़ी और जानी-मानी कंपनियां सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं. ओलाम इंडिया (Olam India) ने उत्तर प्रदेश और बिहार के एफपीओ से 800 टन मक्का और 3,000 टन गेहूं की सीधी खरीद की है. इसके अलावा, ब्रिटानिया, मदर डेयरी और एचआईएल (HIL) जैसी प्रमुख कंपनियों के भी एफपीओ मॉडल से जुड़ने की खबर सामने आई है. यह ट्रेंड दिखाता है कि अब कॉरपोरेट सेक्टर भी किसानों से सीधे जुड़ने को लेकर गंभीर हो रहा है.

मंडी टैक्स हटाने की मांग भी तेज

हालांकि एफपीओ अभी भी यह मांग कर रहे हैं कि मंडी टैक्स पूरी तरह से हटाया जाए, क्योंकि अक्सर यह शुल्क किसानों की आमदनी से काट लिया जाता है. एक एफपीओ प्रमुख ने बताया, “खरीदार टैक्स नहीं देता, लेकिन पैसे हमारे हिस्से से काट लिए जाते हैं.”

अब ऑनलाइन भी बेचेंगे किसान

सरकार ने एफपीओ को अपने ब्रांड बनाने और ऑनलाइन बिक्री के लिए भी प्रेरित किया है. इसके लिए ONDC (Open Network for Digital Commerce) जैसे प्लेटफॉर्म की मदद ली जा रही है. इससे किसान अब सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार ओलाम एग्री के असिस्टेंट मैनेजर प्रवीण सिन्हा ने एक वेबिनार में कहा कि अगर एफपीओ लगातार अच्छी क्वालिटी बनाए रखें तो 5–6 फीसदी का प्रोफिट मार्जिन वे खुद कमा सकते हैं जो पहले बिचौलियों को मिलता था.

10,000 एफपीओ बन चुके हैं,

सरकार का 10,000 एफपीओ बनाने का लक्ष्य अब पूरा हो चुका है. अब अगला कदम है इन एफपीओ की आमदनी को बढ़ाना और उन्हें लंबे समय तक सक्षम बनाना. इसके लिए सरकार तकनीकी मदद, मार्केटिंग ट्रेनिंग और कंपनियों से कनेक्शन देने पर लगातार काम कर रही है.

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Published: 11 Jun, 2025 | 10:34 AM
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