कॉफी और कोको बाजार में बड़ा उलटफेर, अल नीनो की आहट से कीमतों में भारी उथल-पुथल
Coffee Prices: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉफी और कोको की कीमतों में इस सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. एल नीनो की बढ़ती आशंका, मौसम से जुड़ी चिंताओं और सट्टेबाजी के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ गई. हालांकि शुक्रवार को कीमतों में गिरावट आई, लेकिन पूरे सप्ताह के दौरान कॉफी और कोको दोनों की कीमतें बढ़त में रहीं.
Coffee Market: दुनियाभर में कॉफी और कोको की कीमतों में इन दिनों जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. हफ्ते की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी के बाद शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉफी और कोको दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, पूरे सप्ताह का हिसाब देखें तो दोनों जिंसें अब भी बढ़त में हैं. अल नीनो (El Nino) की बढ़ती आशंका, मौसम से जुड़ी चिंताएं और सट्टेबाजों की सक्रियता ने बाजार को काफी अस्थिर बना दिया है.
रिकॉर्ड तेजी के बाद कॉफी के दाम गिरे
अंतरराष्ट्रीय ICE एक्सचेंज पर अरेबिका कॉफी की कीमत शुक्रवार को कारोबार के दौरान करीब 8 फीसदी तक गिर गई. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखी गई थी. गुरुवार को अरेबिका कॉफी करीब 12 फीसदी उछली थी, लेकिन अगले ही दिन इसमें तेज गिरावट आ गई. इसी तरह रोबस्टा कॉफी की कीमतों में भी करीब 5 फीसदी की कमी आई. हालांकि पूरे सप्ताह के दौरान दोनों तरह की कॉफी की कीमतें अब भी पिछले सप्ताह के मुकाबले ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.
एल नीनो की आशंका से बढ़ी बाजार की चिंता
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि, इस बार अल नीनो मौसम प्रणाली के मजबूत होने की संभावना ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के बीच बहुत मजबूत अल नीनो बनने की 81 प्रतिशत संभावना है. अगर ऐसा होता है तो ब्राजील, इक्वाडोर और पश्चिमी अफ्रीका जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में मौसम बिगड़ सकता है. इन इलाकों में कॉफी और कोको की खेती बड़े पैमाने पर होती है. खराब मौसम का असर उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले महीनों में कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है.
सट्टेबाजी से बढ़ा उतार-चढ़ाव
सप्ताह की शुरुआत में कॉफी और कोको के कारोबार में निवेशकों ने बड़ी मात्रा में पैसा लगाया, जिससे दोनों की कीमतें अचानक तेजी से बढ़ गईं. इसके बाद ICE एक्सचेंज ने कॉफी और कोको के कारोबार के लिए पहले से ज्यादा अग्रिम जमा राशि (मार्जिन) जमा करने का नियम लागू कर दिया. इससे बाजार में पैसों की उपलब्धता कम हो गई और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव शुरू हो गया.
विशेषज्ञों का कहना है कि कई निवेशक सिर्फ एक दिन के लिए खरीद-फरोख्त करते हैं. वे सुबह सौदा करते हैं और शाम तक उसे बेचकर बाजार से निकल जाते हैं. इसी वजह से कॉफी और कोको की कीमतों में कभी तेज बढ़ोतरी तो कभी अचानक गिरावट देखने को मिलती है.
कोको बाजार पर भी एल नीनो का असर
कोको की कीमतों में भी शुक्रवार को करीब 10 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई. इसके बावजूद पूरे सप्ताह में कोको मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता रहा. दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत कोको का उत्पादन पश्चिमी अफ्रीका में होता है. वहीं इक्वाडोर भी प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल है. अल नीनो के कारण इन क्षेत्रों में अधिक बारिश, बीमारियां और फसलों की खराब देखभाल जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. आइवरी कोस्ट में 2026-27 के मुख्य कोको उत्पादन में 10 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट की आशंका जताई गई है. इससे भविष्य में चॉकलेट उद्योग पर भी असर पड़ सकता है.
चीनी की कीमतों में भी नरमी
कॉफी और कोको के साथ-साथ चीनी के बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली. कच्ची और सफेद दोनों तरह की चीनी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. हालांकि आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति और वैश्विक उत्पादन के आधार पर इन जिंसों की कीमतों में फिर बदलाव हो सकता है.
किसानों और बाजार के लिए क्या मायने हैं?
अल नीनो की वजह से मौसम में बदलाव का असर केवल कॉफी और कोको तक सीमित नहीं रहता. इसका असर दुनिया की कई प्रमुख कृषि फसलों पर पड़ता है. अगर प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन घटता है तो वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं.