मनरेगा मजदूरों के लिए बड़ी तैयारी: VB-G RAM G योजना में बिना रुकावट होगा शामिल, जल्द बनेंगे नियम
केंद्र सरकार जल्द ही ऐसा सिस्टम लागू करने वाली है, जिससे मनरेगा से जुड़े करोड़ों श्रमिकों को बिना किसी झंझट के नई VB-G RAM G योजना से जोड़ा जा सके. सरकार का दावा है कि इस बदलाव से न तो मजदूरों की पहचान बदलेगी और न ही उनके काम और मजदूरी पर असर पड़ेगा.
VB-G RAM G scheme: ग्रामीण भारत में काम की तलाश में भटकते मजदूरों के लिए अब एक बड़ा बदलाव आने वाला है. सालों से रोजगार का सहारा बनी मनरेगा योजना अब एक नए रूप में आगे बढ़ने जा रही है. केंद्र सरकार जल्द ही ऐसा सिस्टम लागू करने वाली है, जिससे मनरेगा से जुड़े करोड़ों श्रमिकों को बिना किसी झंझट के नई VB-G RAM G योजना से जोड़ा जा सके. सरकार का दावा है कि इस बदलाव से न तो मजदूरों की पहचान बदलेगी और न ही उनके काम और मजदूरी पर असर पड़ेगा, बल्कि रोजगार की गारंटी पहले से ज्यादा मजबूत होगी.
सरकार जल्द लाएगी नए नियम
बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही ऐसे नियम बनाएगी, जिससे मौजूदा मनरेगा मजदूरों को VB-G RAM G योजना में शामिल करना बेहद आसान हो सके. योजना यह है कि मनरेगा के तहत जारी ई-केवाईसी से जुड़े जॉब कार्ड को ही नई योजना में भी मान्य किया जाए. यानी मजदूरों को न तो नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा और न ही बार-बार दस्तावेज जमा करने पड़ेंगे. इसके साथ ही, काम के स्थल भी वही रह सकते हैं, जहां पहले मनरेगा के तहत काम होता था.
राज्यों को मिलेगा छह महीने का समय
केंद्र सरकार जब इस नए कानून को औपचारिक रूप से लागू करेगी, तब राज्यों को करीब छह महीने का समय दिया जाएगा. इस दौरान राज्य सरकारें अपनी मौजूदा व्यवस्था को नई योजना के हिसाब से तैयार करेंगी. इसी समय यह भी तय किया जाएगा कि फंड का बंटवारा कैसे होगा और किस राज्य को कितनी राशि मिलेगी. अधिकारियों के मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया धीरे-धीरे और सोच-समझकर की जाएगी, ताकि किसी भी मजदूर का काम या कमाई किसी भी हाल में प्रभावित न हो.
मांग आधारित और सार्वभौमिक होगी योजना
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि VB-G RAM G योजना भी मनरेगा की तरह मांग आधारित होगी. यानी अगर कोई ग्रामीण मजदूर काम की मांग करता है, तो उसे रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होगी. इस योजना को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही थी कि केंद्र किसी क्षेत्र में इसे लागू या बंद कर सकता है, लेकिन अधिकारियों ने साफ किया है कि मनरेगा में भी ऐसी ही कानूनी व्यवस्था पहले से मौजूद थी.
ग्राम पंचायतों को तीन श्रेणियों में बांटने की तैयारी
नई योजना के तहत ग्राम पंचायतों को ए, बी और सी श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव भी रखा गया है. यह वर्गीकरण पंचायत की जरूरतों और उसकी भौगोलिक स्थिति के आधार पर होगा, जैसे नजदीकी शहर से दूरी. हालांकि, यह वर्गीकरण राज्यों के लिए केवल एक मार्गदर्शक होगा, बाध्यकारी नहीं. राज्यों को अपनी जरूरत के अनुसार योजना अपनाने की छूट रहेगी.
पारदर्शिता पर खास जोर
VB-G RAM G योजना में पारदर्शिता को और मजबूत किया जाएगा. इसके लिए सामाजिक ऑडिट को अनिवार्य और सख्त बनाया जा रहा है. योजना को पंचायती राज मंत्रालय के “पंचायत निर्णय” ऐप से जोड़ा जाएगा, ताकि हर काम की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहे. इसके अलावा, हर हफ्ते किए गए कार्यों का सार्वजनिक खुलासा किया जाएगा. भुगतान और काम का पूरा हिसाब रखने के लिए ई-मेजरमेंट बुक की व्यवस्था भी की जाएगी.
केंद्र सरकार का बड़ा निवेश
सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए केंद्र सरकार की हिस्सेदारी करीब 95 हजार करोड़ रुपये हो सकती है. अगर काम की मांग बढ़ती है, तो इस राशि को और बढ़ाया जा सकेगा, ठीक वैसे ही जैसे मनरेगा में होता रहा है. यह संकेत देता है कि सरकार ग्रामीण रोजगार को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहती.
अमृत सरोवर बने बड़ी उपलब्धि
मनरेगा के तहत अब तक देशभर में करीब 68 हजार अमृत सरोवर बनाए जा चुके हैं, जबकि लक्ष्य 50 हजार का था. इनमें से करीब 23 हजार नए तालाब बनाए गए और 45 हजार से ज्यादा पुराने जलाशयों का पुनर्जीवन किया गया. सरकार मानती है कि ऐसे कामों से न सिर्फ रोजगार मिला, बल्कि गांवों में जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिला.
ग्रामीण भारत के लिए नई उम्मीद
VB-G RAM G योजना को मनरेगा के अगले कदम के तौर पर देखा जा रहा है. अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार, पारदर्शिता और स्थिर आय की एक नई उम्मीद बन सकती है. सरकार का दावा है कि बदलाव बड़ा जरूर है, लेकिन मजदूरों के लिए यह बदलाव आसान और लाभकारी होगा.