गेहूं पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा सरकार की नई पहल, अब हर खेत का तैयार होगा नक्शा
कड़ी निगरानी के लिए हर जिले में किसानों के लिए नोडल अधिकारी तय किए जाएंगे और एक अधिकारी अधिकतम 100 किसानों की जिम्मेदारी संभालेगा. हरियाणा के एक वरिष्ठ कृषि अधिकारी ने कहा कि राज्य पहले ही कार्य योजना तैयार करना शुरू कर चुका है.
Stubble Management: दिल्ली- एनसीआर में वसंत ऋतु के दौरान गेहूं की बची हुई पुआल जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए हरियाणा इस साल एक नई पहल करेगा. राज्य हर गांव में हर खेत का नक्शा तैयार करेगा और यह बताएगा कि गेहूं की पुआल कटाई के समय किस तरह से संभाली जाएगी. यह कदम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के नए निर्देशों के बाद उठाया गया है, जिन्होंने पिछले साल पूरे उत्तर भारत में गेहूं के मौसम में आग लगने की घटनाओं पर कड़ी निगरानी शुरू की थी. हालांकि गेहूं की बची हुई पुआल जलाने पर पहले धान के जलाने जितना ध्यान नहीं दिया जाता था.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, अब यह अप्रैल और मई में प्रदूषण का बड़ा कारण बन गई है. 2025 के गेहूं मौसम में हरियाणा में 1 अप्रैल से 31 मई के बीच 1,832 आग की घटनाएं हुईं, पंजाब में 10,200 से ज्यादा और यूपी के एनसीआर जिलों में 259 घटनाएं दर्ज की गईं. अधिकारियों ने कहा कि मजदूरों की कमी, पुआल संभालने की उच्च लागत और कटाई के समय फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी की सीमित उपलब्धता इसके मुख्य कारण हैं. साथ ही, गारंटीकृत खरीद का भरोसा होने से किसानों ने गेहूं की खेती बढ़ाई, जिससे पुआल की मात्रा भी बढ़ गई. इसके जवाब में हरियाणा को निर्देश दिया गया है कि वह हर खेत का प्रबंधन योजना तैयार करे और तय करे कि पुआल को मिट्टी में मिलाया जाएगा, चारा बनाया जाएगा, किसी अन्य जगह उपयोग के लिए भेजा जाएगा या फसल विविधीकरण के जरिए संभाला जाएगा.
नोडल अधिकारी तैनात किए जाएंगे
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कड़ी निगरानी के लिए हर जिले में किसानों के लिए नोडल अधिकारी तय किए जाएंगे और एक अधिकारी अधिकतम 100 किसानों की जिम्मेदारी संभालेगा. हरियाणा के एक वरिष्ठ कृषि अधिकारी ने कहा कि राज्य पहले ही कार्य योजना तैयार करना शुरू कर चुका है. उनका कहना है कि इस गेहूं मौसम में हमारा ध्यान खेतों में सख्त निगरानी और हर किसान तक मशीनरी और जरूरी मदद पहुंचाने पर है, ताकि कोई किसान पुआल जलाना ही आखिरी विकल्प न समझे. हम ऐसे सिस्टम लागू कर रहे हैं जिससे हर किसान को विकल्प मिल सके.
भंडारण ढांचा मजबूत होगा
निर्देश का एक प्रमुख लक्ष्य समय पर और पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध कराना है. राज्यों को मोबाइल ऐप के जरिए मशीनों की पहुंच सुनिश्चित करने और छोटे व सीमांत किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) से मुफ्त मशीनरी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. आयोग ने कहा कि कटाई के छोटे समय-सिंचाई विंडो में मशीनों की कमी ही जलाने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है. हरियाणा को गेहूं की पुआल को सुरक्षित तरीके से संग्रहित करने के लिए भंडारण ढांचा मजबूत करने के लिए भी कहा गया है, ताकि दुर्घटनात्मक आग को रोका जा सके और पूरे साल चारे की उपलब्धता बनी रहे. हर जिले को ऐसा अवशेष आपूर्ति नेटवर्क तैयार करना होगा जिससे पुआल को जल्दी इकट्ठा, संग्रहीत और उन उद्योगों तक पहुंचाया जा सके जो इसे इस्तेमाल कर सकते हैं.
ब्लॉक स्तर पर विशेष पराली सुरक्षा तैयार होगी
सख्त निगरानी के लिए CAQM ने राज्य को निर्देश दिया है कि जिले और ब्लॉक स्तर पर विशेष पराली सुरक्षा बल बनाया जाए. यह टास्क फोर्स, जिसमें पुलिस, कृषि अधिकारी और स्थानीय प्रशासक शामिल होंगे, शाम और रात के समय विशेष पेट्रोलिंग करेगी, क्योंकि किसान अक्सर उपग्रह निगरानी से बचने के लिए इसी समय खेत जलाते हैं. नियामक ने उल्लंघनों पर पर्यावरणीय जुर्माने की सख्त वसूली और जलाने के विकल्प और स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया है. हरियाणा, पंजाब और यूपी को मासिक प्रगति रिपोर्ट CAQM को सौंपनी होगी. आयोग ने कहा कि गेहूं की पुआल जलाना, जो पहले मामूली समस्या माना जाता था, अब एनसीआर की वसंतकालीन वायु गुणवत्ता के लिए गंभीर और कम पहचानी जाने वाली चुनौती बन गया है.