Success Story: नाबार्ड की ‘ग्राम दुकान’ ने बदल दी महिलाओं की जिदगी, अपने हुनर से अब बन रही हैं आत्मनिर्भर!

Women Empowerment Schemes: राजनांदगांव में NABARD की ‘ग्राम दुकान’ ग्रामीण महिलाओं को अपने हस्तनिर्मित उत्पाद जैसे कि हस्तशिल्प, मसाले और साबुन बेचने का मंच दे रही है. यह पहल महिलाओं को आय, आत्मविश्वास और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान का अवसर देती है और साबित करती है कि सही समर्थन और अवसर मिलने पर महिलाएं अपनी जिंदगी बदल सकती हैं.

नोएडा | Published: 11 Feb, 2026 | 08:19 PM

Success Story: छोटे-छोटे हाथ, बड़े-बड़े सपने… राजनांदगांव की महिलाओं ने नाबार्ड (National Bank for Agriculture and Rural Development) की ‘ग्राम दुकान’ के जरिए साबित कर दिया कि मेहनत, हुनर और लगन से कोई भी अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है. अब वे सिर्फ अपने परिवार की मदद नहीं कर रही हैं, बल्कि अपने हुनर को बाजार में पेश करके आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं. यह पहल महिलाओं के लिए सिर्फ आय का जरिया नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और समाज में उनकी अहमियत बढ़ाने का भी साधन बन गई है.

पाताल भैरवी मंदिर के पास बनी इस दुकान में महिलाएं अपने हाथ से बने उत्पाद बेच रही हैं. यह दुकान उनके लिए अपना हुनर दिखाने और नियमित आय कमाने का मंच बन गई है. निशा मंडावी जैसी महिला संचालिकाओं का कहना है कि अब वे न केवल अपने परिवार की मदद कर पा रही हैं, बल्कि अपने हुनर से समाज में भी सम्मान पा रही हैं.

किस तरह के उत्पाद बिक रहे हैं

ग्राम दुकान में महिलाएं कई तरह के उत्पाद बेच रही हैं, जैसे:

महिलाएं अपने उत्पादों को आकर्षक तरीके से पैक करके बेचती हैं, जिससे उन्हें नियमित आय मिलती है.

श्रद्धालुओं से मिली खास सफलता

दुकान मंदिर के पास होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं से उत्पादों को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. दुकान संचालिका निशा मंडावी बताती हैं कि इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने परिवार की मदद कर पा रही हैं.

महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था

ग्राम दुकान योजना के अंतर्गत समूह की महिलाओं को नाबार्ड ने नि:शुल्क दुकान उपलब्ध कराई गई है, जिससे उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए सुलभ और स्थायी मंच मिल गया है. ग्राम दुकान योजना से महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो रहा है. महिलाएं अब अपने हुनर और मेहनत के दम पर जीवन स्तर सुधार रही हैं.

नाबार्ड की यह पहल दिखाती है कि सही अवसर और समर्थन मिलने पर महिलाएं न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए बदलाव ला सकती हैं. छोटे हाथों की मेहनत और बड़े सपनों की लगन ने राजनांदगांव में एक नई सशक्तिकरण की कहानी लिख दी है.

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